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    ब्वॉयफ्रेंड के सामने ही 11 लड़कों ने किया था छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म, जुड़ा है लंदन से इसका लिंक

    By JP YadavEdited By:
    Updated: Thu, 22 Feb 2018 08:10 AM (IST)

    किशोर न्याय बोर्ड ने घटना के वक्त नाबालिग आरोपित को दोषी करार देने के साथ ही तीन साल की सजा सुनाई है।

    ब्वॉयफ्रेंड के सामने ही 11 लड़कों ने किया था छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म, जुड़ा है लंदन से इसका लिंक

    नोएडा (ललित विजय)। गढ़ी चौखंडी सामूहिक दुष्कर्म कांड में न्याय की छोड़ चुकी पीड़िता नौ साल बाद मंगलवार को मुस्कुराई। न्याय की छोड़कर लंदन में रह रही पीड़िता को उसके घर वाले व वकील ने किशोर न्याय बोर्ड के आदेश से अवगत कराया। पीड़िता के वकील अनुपम शर्मा ने बताया कि बात करते वक्त युवती की आंखें भर गईं। पीड़िता ने कहा कि तीस हजारी कोर्ट के आदेश के बाद न्याय की ही खत्म हो गई थी।

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    अब किशोर न्याय बोर्ड से एक को सजा मिलने के बाद फिर से न्याय की जगी है। अब मैं भारत भी आऊंगी और दिल्ली हाई कोर्ट में गवाही भी दूंगी। अनुपम शर्मा ने बताया कि पीड़िता ने पहले निराश होकर भारत न आने व हाई कोर्ट में गवाही न देने की बात कही थी। अब वह बहुत खुश है। अब उसने कहा कि आगे की लड़ाई भी वह लड़ेगी व सभी को सजा दिलाएगी।

    पीड़िता के जीजा ने भी बताया कि किशोर न्याय बोर्ड के फैसले से पूरा परिवार खुश है। गौरतलब है कि सोमवार को किशोर न्याय बोर्ड ने घटना के वक्त नाबालिग आरोपित को दोषी करार दे दिया था, इसके साथ ही तीन साल की सजा भी सुनाई है।

    बरी आरोपित हुए परेशान

    तीस हजारी कोर्ट से बरी आरोपित किशोर न्याय बोर्ड का फैसला आने के बाद से परेशान हैं। उन्होंने वकील से संपर्क कर किशोर न्याय बोर्ड के फैसले की जानकारी ली। साथ ही इसका उनपर पड़ने वाले असर के बारे में विस्तार से जाना।

    एक नजर में गढ़ी चौखंडी सामूहिक दुष्कर्म कांड

    5 जनवरी 2009 को शाम करीब पांच बजे लाजपत नगर दिल्ली निवासी एमबीए छात्र और हौजखास स्थित पुलिस कॉलोनी निवासी दोस्त कार से नोएडा घूमने आए थे। दोनों सेक्टर 71 की सुनसान सड़क पर कार के अंदर बातचीत कर रहे थे।

    इसी दौरान मेरठ से क्रिकेट टूर्नामेंट जीतकर लौट रही गढ़ी चौखंडी गांव के 11 युवकों की टीम ने छात्रा और उसके प्रेमी को बंधक बना पास के जंगल में उससे सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले में नौ आरोपियों को फरवरी 2017 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने आरोप से मुक्त कर बरी कर दिया था।