दिल्ली कोर्ट का फैसला, नाबालिग से बार-बार दुष्कर्म के दोषी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा
दिल्ली की एक अदालत ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के दोषी बिप्लव दास को दस साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। अदालत ने कहा कि अपराध का पीड़िता के जीवन पर गहरा असर पड़ा है और पुनर्वास के प्रयास जरूरी हैं। दोषी ने पीड़िता का कई सालों तक यौन शोषण किया था।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने नाबालिग लड़की से बार-बार दुष्कर्म करने के दोषी बिप्लव दास को 10 वर्षों के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता को हुए मानसिक और शारीरिक आघात का कोई मूल्य तय नहीं किया जा सकता, लेकिन न्यायिक प्रणाली की ओर से पुनर्वास की कोशिश जरूरी है।
विशेष न्यायाधीश पवन सिंह राजावत ने कहा कि इस अपराध का असर पीड़िता की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्थिति पर गहरा और स्थायी रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोपित को इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती कि वह पहली बार अपराध करने वाला है या परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है।
कोर्ट ने दोषी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के माध्यम से पीड़िता को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह मुआवजा उसकी मेडिकल, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़ी जरूरतों को देखते हुए तय किया गया।
पीड़िता की हालत गंभीर, जीवन पर पड़ा स्थायी असर
कोर्ट में दाखिल विक्टिम इम्पैक्ट रिपोर्ट में बताया गया कि अपराध के समय पीड़िता महज.14 वर्ष की थी और आरोपित ने चार साल तक उसका यौन शोषण किया। इस दौरान उसे आपरेशन करवाना पड़ा, जिसमें उसकी एक फालोपियन ट्यूब निकालनी पड़ी। कोर्ट ने माना कि इससे उसकी प्रजनन क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गहरा असर पड़ा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मानसिक आघात के चलते पीड़िता को नियमित स्कूल छोड़ना पड़ा और अब वह ओपन स्कूल से पढ़ाई कर रही है। उसकी आमदनी 50 हजार रुपए प्रतिमाह है, जो उसकी दवाओं, थेरेपी, परिवार की जरूरतों और छोटी बहन की पढ़ाई में खर्च हो जाती है।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि बिप्लव दास ने लड़की को बहलाया-फुसलाया और लंबे समय तक शोषण करता रहा। यह भरोसे का अपराध था, जिसमें लड़की की कम उम्र और मानसिक निर्भरता का फायदा उठाया गया। अभियोजन पक्ष ने दोषी को अधिकतम सजा देने की मांग की थी।
दोषी बिप्लव दास की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि वह पहली बार अपराध करने वाला है और उसके परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसी पर है।
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