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    Batla House Encounter Case: जब आतंकियों को बताया गया था मासूम, बहाए गए थे 'आंसू'

    By Mangal YadavEdited By:
    Updated: Mon, 15 Mar 2021 05:57 PM (IST)

    सलमान खुर्शीद ने कहा कि था बाटला हाउस एनकाउंटर में मृत लड़कों की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी भावुक हो गई थी। हालांकि खुर्शीद ने अपने बयान को बाद में स्पष्ट किया था कि उन्होंने रोने की बात नहीं कही है।

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    एनकाउंटर को फर्जी करार देकर खलबली मचा दी थी।

    नई दिल्ली [निहाल सिंह]। बाटला हाउस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस ने जिन आंतकियों को मारा था उनको लेकर देश की राजनीति गर्म रही है। यह एनकाउंटर न केवल राज्यों के चुनाव का मुद्दा बन गया था बल्कि लोकसभा चुनावों के केंद्र में भी रहा है। लेकिन, दिल्ली पुलिस की जांच और कार्रवाई सभी पैमानों पर खरी उतरी। इसी का परिणाम है राजधानी में सिलसिले वार हुए बम धमाकों में शामिल आरिज को अदालत ने दोषी करार दिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्रालय ने पुलिस की आतंक के खिलाफ कार्रवाई को खरा पाया।

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    इस मामले की बात करें तो मृत आतंकियों को मासूम बताने से लेकर उनकी मौत पर आंसू भी बहाए गए हैं। वहीं, तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के नेताओं ने ही इस एनकाउंटर को फर्जी करार देकर खलबली मचा दी थी।

    वर्ष 2008 में हुए एनकाउंटर के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस एनकाउंटर को फर्जी बता दिया था। इतना ही नहीं एक नहीं कई बार वह अपनी बात पर अड़िग रहे थे। वहीं, वर्ष 2012 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के उस बयान को लेकर भी खूब विवाद मचा था जिसमें उन्होंने इस एनकाउंटर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रोने के बात कह थी। उस समय सलमान खुर्शीद का यह बयान काफी चर्चा में रहा था।

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    सलमान खुर्शीद ने कहा कि था बाटला हाउस एनकाउंटर में मृत लड़कों की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी भावुक हो गई थी। हालांकि खुर्शीद ने अपने बयान को बाद में स्पष्ट किया था कि उन्होंने रोने की बात नहीं कही है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने भी दिग्विजय सिंह के बयान से उस समय किनारा कर लिया था। वर्ष 2012 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिंदबरम ने पुलिस की कार्रवाई को उचित ठहराया था। वहीं, दिग्विजय सिंह के बयान को निजी करार दिया था। कांग्रेस अलावा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ समाजवादी पार्टी (सपा) भी एनकाउंटर का विरोध करती रही है। दोनों पार्टियों ने पुलिस की कार्रवाई को कटघरे खड़ा करते हुए न्यायिक जांच तक की मांग की थी।

    पुलिस की कार्रवाई का भाजपा ने किया था समर्थन

    भाजपा वर्ष 2008 में हुए एनकाउंटर के समर्थन में रही है। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए उस समय दिल्ली में सड़को पर प्रदर्शन किया था। इतना ही भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ही जामिया इलाके में चौक का नाम मोहन चंद शर्मा चौक कर दिया था। वर्ष 2019 के आम चुनाव के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल की सभा में कहा था कि बाटला हाउस में आंतकियों के मरने पर सोनिया गांधी को रोना आया था लेकिन शहीद हुए पुलिस इंस्पेकटर को लेकर रोना नहीं आया।

    एनएचआरसी ने दी पुलिस को क्लीन चिट

    वर्ष 2008 में हुए इस एनकाउंटर को दिल्ली पुलिस को एनएचआरसी से क्लीन चिट मिल चुकी है। दरअसल, वर्ष 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दो माह में इसकी जांच करने को कहा था। एनएचआरसी ने पुलिस की को क्लीन चिट दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर न्यायिक जांच की मांग को खारिज कर दिया था। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती मिली तो वहां से भी इसे खारिज कर दिया गया।

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