नई दिल्ली [वीके शुक्ला]। देश की राजधानी दिल्ली में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और अन्य संपत्तियों के सर्किल रेट को 20 फीसद तक कम करने की योजना को तीन महीने और बढ़ाने की तैयारी चल रही है। दिल्ली में  सत्तासीन आम आदमी पार्टी सरकार जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर इसे 30 सितंबर के बाद भी तीन महीने तक और बढ़ाने की मंजूरी देगी। 

इस बाबत दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस निर्णय से संपत्ति खरीदने के इच्छुक लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और इससे रियल एस्टेट क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। बताया जा रहा है कि सर्किल रेट में 20 फीसद की कमी से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में एक फीसद के करीब असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के कारण सामान्य रूप से राष्ट्रीय स्तर पर भी अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव पड़ा है। विशेष रूप से अचल संपत्ति के क्षेत्र में मंदी देखी गई है। संपत्ति की खरीदारी में गिरावट आई है। इस दौरान लाखों निर्माण श्रमिकों की नौकरियां चली गई हैं। अचल संपत्ति क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और लोगों को अपनी खोई हुई नौकरियों को वापस पाने की आवश्यकता है। बता दें कि सर्किल रेट में 20 फीसद कटौती की योजना गत फरवरी माह में लागू की गई थी। दिल्ली सरकार को 2002-21 में संपत्ति पंजीकरण और स्टांप शुल्क से 5297 करोड़ रुपये राजस्व की उम्मीद थी, लेकिन कोविड के चलते यह घटकर 3297 करोड़ आ गई।

2011 में की गई सर्किल रेट में वृद्धि

गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली में वर्ष 2011 में संपत्ति के सर्किल रेट में इजाफा हुआ था। नवंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली का सर्किल रेट बढ़ाया गया था। लोगों को जानकर हैरानी भी हो सकती है कि तब कुछ श्रेणी के सर्किल रेट में 250 फीसद तक की वृद्धि हुई थी। 

यहां पर बता दं कि दिल्ली में संपत्तियों को कुल 8 श्रेणी ए से एच तक में बांटा गया है। ए श्रेणी की संपत्ति में वसंतकुंज जैसे इलाके शामिल हैं। वहां सबसे अधिक यानी तकरीबन 8 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर की दर है, जबकि नंदनगरी जैसे इलाके सबसे सस्ती श्रेणी में आते हैं, यहां पर 23,380 रुपये प्रति वर्गमीटर सर्किल रेट है।

Edited By: Jp Yadav