World Book Fair में आखिर क्या कर रहा है 'बुकचोर', जिसने भी देखा चौंक पड़ा
विश्व पुस्तक मेला में हॉल नंबर दस में ‘बुकचोर’ के नाम से एक स्टॉल है।
नई दिल्ली (अनंत विजय)। प्रगति मैदान में जारी विश्व पुस्तक मेला की थीम पर्यावरण है। इस थीम को लेकर मेले के आयोजक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास बहुत सारे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। प्रकाशक भी पर्यावरण पर लिखी पुस्तकों की खरीद पर विशेष छूट दे रहे हैं। इन सबसे अलग पर्यावरण और पुस्तकों को लेकर एक अनोखी पहल देखने को मिल रही है। मेले में हॉल नंबर दस में ‘बुकचोर’ के नाम से एक स्टॉल है।
इस स्टॉल पर पुरानी किताबें बहुत सस्ते दामों पर बेची जा रही हैं। बाइस सौ पचास रुपए की ट्राएलॉजी ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ सिर्फ ढाई सौ रुपये में मिल रही है। इसी तरह से एन फ्रेंक की मशहूर पुस्तक ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ 139रु में मिल रही है। इस स्टॉल पर अच्छी खासी संख्या में खरीदार पहुंच रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ‘बुकचोर’ पुरानी किताबें इस वजह से बेच रहे हैं कि ताकि पेड़ों को बचाया जा सके। इसको ही वो प्रचारित भी कर रहे हैं जो पाठकों की कौतूहल का कारण भी बन रहा है।
‘बुकचोर’ के सह संस्थापक आलोक शर्मा ने बताया कि वो और उनके साथी पुस्तकें खरीदना चाहते थे लेकिन उनकी कीमत अधिक होने की वजह से खरीद नहीं पाते थे। उन्होंने और उनके तीन दोस्तों ने मिलकर इसकी शुरुआत की।
पहले उन्होंने पुरानी किताबें थोक में खरीदनी शुरू की, फिर वेबसाइट बनाया और अब इसका एप भी लांच किया। इसके अलावा उनके जेहन में पेड़ों को बचाने की चिंता भी थी। आलोक के मुताबिक ऐसे ढेर सारे पाठक हैं जो पुस्तके पढ़ने के बाद उसको कबाड़ में डाल दे हैं।
उनका उद्देश्य है कि एक पुस्तक को ज्यादा से ज्यादा पाठक पढ़ सकें। उनका कहना है कि ‘बुकचोर’ नाम रखने के पीछे मंशा पाठकों को चौंकाने की थी। जो भी पुरानी पुस्तकें बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं, उनकी गुणवत्ता का खास ख्याल रखा जाता है।
पुरानी किताबों के हर पन्ने की जांच की जाती है, ताकि उसको खरीदने वाले पाठक को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। ‘बुकचोर’ से किताबें खरीद रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रभात रंजन ने बताया कि ये एक बहुत अच्छी पहल है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि हिंदी में इस तरह की पहल क्यों नहीं होती है।
नक्षत्र मेला : नवरत्न वृक्ष घर लाएं, सकारात्मक ऊर्जा पाएं
विश्व पुस्तक मेले में पहुंच रहे लोग गेट नं. एक के पास लाउंज बी में चल रहे नक्षत्र मेले का भी अवलोकन कर रहे हैं। गुजरात से आए कृष्णा अगाटे एक्सपोर्ट के विनीश पी पटेल बताते हैं कि नवर} वृक्ष लोगों को काफी पसंद आ रहा है। इस वृक्ष को घर या दफ्तर में रखकर वहां की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदला जा सकता है।
जौहरी जयपुर वाला के एसएन गोयल बताते हैं कि रत्नों के प्रति अब हर वर्ग और उम्र के लोग आकर्षित हो रहे हैं। मनोवैज्ञानिक शांति पाने व ग्रह दोष निवारण के लिए लोग रोज ही इनकी खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं।
नक्षत्र मेले में हस्तरेखा दिखा रहीं 25 साल की वर्तिका ने बताया कि भविष्य जानना उत्सुकता का विषय तो है। आइटीपीओ के साथ नक्षत्र मेला की संयुक्त आयोजक फ्यूचर प्वाइंट की निदेशक आभा बंसल ने बताया कि यह मेला भी 14 जनवरी तक चलेगा। मेला भारतीय वैदिक विज्ञान जैसे ज्योतिष, वास्तु, हस्तरेखा, अंकगणित इत्यादि पर फोकस है।
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