Delhi Chunav: BJP को दिल्ली की इन 11 सीटों पर है कमल खिलने का इंतजार, 30 सीटों के लिए PM मोदी का है खास प्लान
दिल्ली चुनाव में भाजपा 11 सीटों पर जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। इनमें से अधिकांश सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित और मुस्लिम बहुल हैं। 1993 से अब तक इन सीटों पर भाजपा को जीत नहीं मिली है। पार्टी ने इन सीटों पर विशेष ध्यान दिया है और 30 विधानसभा क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहां अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाता 30 प्रतिशत से अधिक हैं।

संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए भाजपा इस बार हरसंभव प्रयास कर रही है। पार्टी के बड़े नेता चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं को प्रत्येक बूथ पर 50 प्रतिशत से अधिक मत के साथ जीत प्राप्त करने का लक्ष्य दिया है। वहीं, दिल्ली में 11 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा को जीत का इंतजार है। इनमें से अधिकांश अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित और मुस्लिम बहुल वाली सीटें हैं।
वर्ष 1993 से लेकर 2020 तक सात विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कोंडली, अंबेडकर नगर, मंगोलपुरी, सुल्तानपुर माजरा व देवली तथा मुस्लिम बहुल ओखला, मटिया महल, सीलमपुर व बल्लीमारान के साथ ही जंगपुरा और विकासपुरी सीट पर एक बार भी कमल नहीं खिला है।
11 सीटों पर दिया जा रहा विशेष ध्यान
लोकसभा में सभी सातों सीटें जीतने के बाद भी भाजपा सीमापुरी, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर माजरा, ओखला, मटिया महल, सीलमपुर, बल्लीमरान व जंगपुरा में पार्टी पिछड़ गई थी। सिर्फ कोंडली, अंबेडकर नगर, मंगोलपुरी व विकासपुरी में भाजपा को बढ़त मिली थी। इसे ध्यान में रखकर पार्टी इन सभी 11 सीटों पर विशेष ध्यान दे रही है।
70 में से 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
दिल्ली में 70 में से 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इनमें से पांच सीटों पर तो पार्टी को अब तक जीत नहीं मिली है। वहीं, वर्ष 2013 के बाद पार्टी एक भी आरक्षित सीट नहीं जीत सकी है। दिल्ली में लगभग 18 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। आरक्षित सीटों के साथ ही लगभग 30 विधानसभा क्षेत्रों में इस वर्ग की अच्छी संख्या है।
भाजपा ने 30 सीटों को किया चिह्नित
भाजपा का कहना है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नौ सीटों पर बढ़त बनाई थी। वर्ष 2014 व 2019 के लोकसभा चुनावों में भी इन क्षेत्रों में पार्टी का अच्छा प्रदर्शन था, परंतु विधानसभा में हार का सामना करना पड़ा था। इसे ध्यान में रखकर भाजपा ने 30 उन विधानसभा क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहां अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाता 30 प्रतिशत से अधिक हैं। अगस्त में इन क्षेत्रों में विस्तारक नियुक्त किए गए थे। पिछले माह इन सीटों पर दूसरे राज्यों के अनुसूचित जाति से संबंधित सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, प्रदेश पदाधिकारियों की तैनाती की गई है।
आरक्षित सीटों पर भाजपा को अच्छा समर्थन मिलेगा
प्रत्येक नेता अपने दायित्व वाले क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर प्रबुद्ध लोगों, आरडब्ल्यूए के सदस्यों, मंदिरों के पुजारियों व अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन्हें भाजपा के साथ जोड़ रहे हैं। पार्टी के नेताओं दावा है कि इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा को अच्छा समर्थन मिलेगा। उन्हें मंगोलपुरी, कोंडली सहित अन्य आरक्षित सीटों पर इस बार कमल खिलने की उम्मीद है।
जंगपुरा में भी पार्टी लोकसभा चुनाव में पिछड़ गई
पार्टी के लिए सबसे अधिक मुश्किल मुस्लिम बहुल ओखला, मटिया महल, सीलमपुर और बल्लीमरान सीट पर कमल खिलाने में हैं। इन सीटों पर न सिर्फ विधानसभा में हार का सामना करना पड़ता है बल्कि लोकसभा में भी पार्टी पिछड़ जाती है। ओखला में पार्टी 70 हजार से अधिक मतों से पिछड़ थी। पार्टी मुस्लिम सीटों पर आप, कांग्रेस और एआईएमआईएम के बीच वोट बंटवारे से अपने लिए संभावना तलाश रही है। जंगपुरा में भी पार्टी लोकसभा चुनाव में पिछड़ गई थी। आप इसे अपने लिए आसान सीट समझती है।
कांग्रेस ने पूर्व महापौर फहराद सूरी को मैदान में उतारा
पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पटपड़गंज छोड़कर इस बार जंगपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने तरविंदर सिंह मारवाह को यहां से चुनाव मैदान में उतारा है। वह कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से पहले चुनाव जीत चुके हैं। कांग्रेस ने पूर्व महापौर फहराद सूरी को मैदान में उतारा है। भाजपा की आप व कांग्रेस के बीच वोट के बंटवारे पर उम्मीद लगाए हुए है। उसे स्थानीय उम्मीदवार का भी लाभ मिलेगा।
विकासपुरी सीट को जीतना भी भाजपा के लिए सपना है। पार्टी ने पंकज कुमार सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। विकासपुरी से आप ने महिंदर यादव को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वह 2008 से लगातार जीत प्राप्त कर रहे हैं। भाजपा ने पंकज कुमार सिंह को और कांग्रेस ने जितेंद्र सोलंकी को अपना उम्मीदवार बनाया है।
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