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    जैविक फिल्टर कम करेगा वाहनों का जहरीला प्रदूषण, तुरई और शैवाल से बनाया बायोस्मोस्ट्रैप

    Updated: Wed, 14 Feb 2024 06:01 PM (IST)

    तुरई और शैवाल का एक लेमिनेट मिश्रण तैयार गया है जिसे वाहनों के साइलेंसर में लगाकर जहरीली गैसों के उत्सर्जन को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। बायोस्मोट्रैप वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड नाइट्रिक ऑक्साइड नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों को 70-80% कम कर सकता है। अब इसको एक कंपनी के माध्यम से वाणिज्यिक प्रक्रिया शुरू करने की पहल की गई है।

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    जैविक फिल्टर कम करेगा वाहनों का जहरीला प्रदूषण

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वाहनों से उत्सर्जित होने वाले प्रदूषीय गैस के कारण शहरों की हवा जहरीली हो रही है। इसका दुष्प्रभाव मानव शरीर पर बेहद घातक हो रहा है। राष्ट्रीय राजधानी समेत देश के कई शहर साल दर साल इसके दुष्प्रभाव को झेल रहे हैं। अब इसे कम करने के लिए पर्यावरण अनुकूल घरेलू संसाधन का उपयोग करने की तैयारी है।

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    सस्ते दर में उपलब्ध होगा मिश्रण

    तुरई और शैवाल का एक लेमिनेट मिश्रण तैयार गया है, जिसे वाहनों के साइलेंसर में लगाकर जहरीली गैसों के उत्सर्जन को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। जल्द ही यह बाजार में काफी सस्ती दर पर उपलब्ध होगी। बायोस्मोट्रैप नाम के इस जैविक फिल्टर को पुणे स्थित डॉ. डीवाई पाटिल जैव संस्थान के माइक्रोबियल डायवर्सिटी सेंटर की टीम ने वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों को कम करने के लिए विकसित किया है।

    बायोस्मोट्रैप वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों को 70-80% कम कर सकता है। इस शोध को पेटेंट संरक्षण प्राप्त है। इसे जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद की ओर से गांधियन यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवोशन ग्रैंड अवार्ड मिल चुका है। परिषद की ओर से पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए इस नवाचार को मान्यता भी दी गई है।

    अब इसको एक कंपनी के माध्यम से वाणिज्यिक प्रक्रिया शुरू करने की पहल की गई है। वर्ष 2014 में शुरू किए गए इस शोध को वर्ष 2022 में पूरा करने के बाद इसे कई स्तर पर एक साल तक जांच की गई। जनवरी में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान में आयोजित एक विज्ञान प्रतियोगिता में शामिल हुए इस नवाचार को प्रथम पुरस्कार दिया गया था और विज्ञानियों ने इसे वायु प्रदूषण को कम करने में किफायती और अहम सफलता बताया था।

    ऐसे किया जाएगा उपयोग

    बायोस्मोट्रैप वाहनों के साइलेंसर के अंतिम सिरे पर लगाया जाएगा, ताकी बदलने में भी आसानी हो। इसके लिए एक एसेंबली होगी, जिसकी मदद से इसे साइलेंसर में लगा दिया जाएगा। इससे वाहन सेे होने वाला उत्सर्जन इसी फिल्टर के माध्यम से होकर गुजरा।

    10 से 50 रुपये होगी कीमत

    इस फिल्टर को हर 500 किमी यात्रा के बाद बदलने की आवश्यकता होगी। ऐसी स्थिति में सिर्फ फिल्टर को बदला जाएगा। फिल्टर की कीमत 10 से 50 रुपये तक होगी। दोपहिया वाहनों के लिए इसकी कीमत कम होगी और चारपहिया वाहनों के लिए अधिक होगी।

    पुराने वाहनों के लिए और भी मददगार

    राजधानी में प्रदूषण ज्यादा बढ़ने पर बीएस3 पेट्रोल और बीएस4 डीजल चालित वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया जाता है। बताया जाता है कि ये वाहन ज्यादा प्रदूषण करते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में वाहन चालकों को परेशानी होती है। इसके परिणाम को देखते हुए उपयोगी माना जा रहा है।

    हम अपने नए जैविक एयर फिल्टर को पेश करके अपने पर्यावरण को स्वच्छ, हरा-भरा और सांस लेने योग्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कम वायु प्रदूषण ही स्वस्थ जीवन समाधान का उत्तर है। इस सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए, हमने बायोस्मोट्रैप का तैयार किया है जो हानिकारक गैसीय प्रदूषण को रोकता है। -डॉ. नीलू नवानी, प्रोफेसर निदेशक, डॉ. डीवाई पाटिल जैव संस्थान, पुणे