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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 25, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Delhi Pollution: वायु प्रदूषण में सुधार, 125 दिन बाद हटी ग्रेप दो की पाबंदियां; एक अभी भी लागू

Published: Tue, 25 Feb 2025 08:51 AM (IST)Updated: Tue, 25 Feb 2025 08:56 AM (IST)

Grape two Restrictions Lifted वायु प्रदूषण में सुधार के चलते दिल्ली से ग्रेप दो के प्रतिबंध हटाए गए हैं। अब ...और पढ़ें

Delhi News: प्रदूषण के स्तर में सुधार, 125 दिन बाद हटीं ग्रेप दो की पाबंदियां। फाइल फोटो
Delhi News: प्रदूषण के स्तर में सुधार, 125 दिन बाद हटीं ग्रेप दो की पाबंदियां। फाइल फोटो

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली।Delhi Pollution: वायु प्रदूषण के स्तर में लगातार सुधार को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से ग्रेप दो के प्रतिबंधों को हटाने का निर्णय लिया है। अब राजधानी में केवल ग्रेप एक के नियम लागू रहेंगे।

सीएक्यूएम की ग्रेप उप समिति के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और अनुकूल मौसम के चलते दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में सुधार दर्ज हुआ है। सोमवार को यह 186 रिकॉर्ड किया गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रेप दो लागू करने के लिए निर्धारित 300 के स्तर से 114 अंक कम है।

इसके बावजूद प्रदूषण की स्थिति मध्यम से खराब श्रेणी में बनी हुई है। सीएक्यूएम के अनुसार, संबंधित एजेंसियों को ग्रेप एक की पाबंदियों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि वायु गुणवत्ता परिदृश्य की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। अगर प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ता है, तो ग्रेप दो के प्रतिबंध दोबारा लागू किए जा सकते हैं।

ग्रेप दो के तहत निम्न प्रतिबंध हटे

  • डीजल जनरेटरों पर लगी रोक हटेगी।
  • प्राइवेट गाड़ियों की पार्किंग फीस में बढ़ोतरी का नियम खत्म।
  • सीएनजी, ई-बसों व मेट्रो ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की जरूरत नहीं।
  • नेचुरल गैस, बायो गैस और एलपीजी से चलने वाले जनरेटरों को अनुमति दी गई थी, अब इसकी जरूरत नहीं होगी।
  • आरडब्ल्यूए को अपने सिक्योरिटी गार्ड्स को हीटर देने का निर्देश अब लागू नहीं रहेगा।

ग्रेप एक के तहत निम्न प्रतिबंध रहेंगे जारी

  • होटल-रेस्टोरेंट में कोयला व लकड़ी के प्रयोग पर प्रतिबंध।
  • बीएस तीन पेट्रोल और बीएस चार डीजल वाहनों पर सख्त निगरानी।
  • निर्माण और विध्वंस कार्यों में धूल नियंत्रण के लिए विशेष उपाय अनिवार्य।
  • खुले में कचरा जलाने पर सख्ती।
  • उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू।