​​​​​नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। मानसून 2022 पूरी तरह से विदा भी नहीं हुआ कि वायु प्रदूषण ने धीरे-धीरे असर दिखाना शुरू कर दिया है। एक सप्ताह पहले दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के शहरों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) जहां 50 के आसपास पहुंच गया था, वहीं अब बारिश थमते ही यह 100 के पार पहुंच गया है। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में इसमें इजाफा होगा। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में वायु प्रदूषण के खराब श्रेणी में पहुंचने की बात कही जा रही है। 

पराली जलाने से बढ़ेगा संकट

हवाएं बंद होने के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक के लगातार बढ़ने का अंदेशा भी जताया गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हवा की दिशा में बदलाव हुआ है और बारिश थम गई है।  आगामी एक से डेढ़ सप्ताह के दौरान पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने लगेंगीं। इसके चलते वायु प्रदूषण में इजाफा होना शुरू हो जाएगा।

जानलेवा साबित होने लगा दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण

डेढ़ दशक पहले नवंबर से जनवरी तक ही वायु प्रदूषण परेशान करता था, लेकिन अब दिल्ली-एनसीआर में छह महीने से अधिक समय तक हवा जहरीली रहती है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर जीवन बेहद कठिन हो गया है। इतना ही नहीं, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण जानलेवा भी साबित होने लगा है, क्योंकि प्रदूषण से कई तरह के कैंसर हो रहे हैं।  

गर्भ में पल रहे बच्चे को भी प्रदूषण से है खतरा

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के चलते गर्भवती महिलाओं पर भी इसका असर पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं के लिए वायु प्रदूषण बेहद नुकसान दायक होता है। खासकर दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति में जब गर्भवती महिला सांस लेती है तो प्रदूषण के कण शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जो महिला के पेट में पल रह बच्चे को नुकसान पहुंचाते हैं। 

वायु प्रदूषण मां और बच्चे को जोड़ने वाली गर्भनाल को क्षतिग्रस्त करके भ्रूण तक को नुकसान करता है। दरअसल, गर्भवती मां जो भी खाती है वह सीधा बच्चे भी ग्रहण करता है। दिल्ली-एनसीआर में दूषित हवा में सांस लेने का असर बच्चे पर भी हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में वायु प्रदूषण के कारण प्री-मेच्योर डिलीवरी का खतरा भी रहता है।

बच्चा भी हो सकता है अस्थमा से पीड़ित

जानकारों की मानें तो वायु प्रदूषण के प्रभाव में आने वाली गर्भवती महिलाओं के साथ गर्भ में पल रहा बच्चा भी इसके असर में आ जाता है। कुछ मामलों में गर्भ में पल रहा बच्चा अस्थमा से भी पीड़ित हो सकता है। यह भी संभव है कि बच्चा जीवन भर फेफड़ों की समस्या से ही पीड़ित रहे।

फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है प्रदूषण

यह वायु प्रदूषण का भी प्रभाव है कि दिल्ली-एनसीआर में ज्यादातर बच्चे फेफड़ों की समस्या से पीड़ित हैं। वहीं, खासतौर से गर्भवती महिलाएं खुद को प्रदूषण से दूर रखें। ऐसे इलाकों में रहें जहां पर कम प्रदूषण हो। दो साल पहले लैंसेट जर्नल में पब्लिश रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया था कि वायु प्रदूषण का गर्भपात से सीधा संबंध है। दिल्ली-एनसीआर में समेत देशभर में वायु गुणवत्ता स्तर को सुधार लें तो 7 प्रतिशत तक प्रेगनेंसी लॉस को रोका जा सकता है।

वायु प्रदूषण के प्रभाव के चलते भारत के साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रत्येक वर्ष 3.49 लाख गर्भपात हो रहे हैं। अगर भारत वायु प्रदूषण को कम कर लेता है तो हर साल गर्भपात के मामलों में 7 फीसदी की कमी आ सकती है।

Edited By: Jp Yadav

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