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    Delhi Election 2025: दिल्ली की एक ऐसी सीट जहां से कांग्रेस को कभी नहीं मिली जीत, क्या इस बार दिखेगा 'हाथ' का कमाल

    Updated: Thu, 26 Dec 2024 05:23 PM (IST)

    दिल्ली की शालीमार बाग सीट पर बीजेपी को लगातार तीसरी बार हार का सामना करना पड़ा है। वहीं कांग्रेस यहां लगातार सात चुनाव हार चुकी है। इस सीट से जुड़े कई रोचक राजनीतिक किस्से हैं। 1993 में अस्तित्व में आई इस सीट से पहले चुनाव में भाजपा के साहिब सिंह वर्मा विधायक बने और बाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री भी बने। इसके बाद रविंद्र बंसल ने लगातार चार चुनाव जीते।

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    Delhi Chunav 2025: शालीमार बाग सीट से लगातार सात बार हार चुकी है कांग्रेस।

    धर्मेंद्र यादव, बाहरी दिल्ली। शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र ( Shalimar Bagh seat) के मतदाताओं के मिजाज को समझना बड़ा मुश्किल है।किस को हीरो बना दें और किसको जीरो कर दें, यहां के मतदाताओं के मूड का कोई भरोसा नहीं।

    लगातार चार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाली भाजपा (Delhi BJP) अब हार की हैट्रिक बना चुकी है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस यहां लगातार सात चुनाव हार चुकी है। आज तक उसे यहां जीत नसीब नहीं हो पाई है।

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    दिल्ली (Delhi News) में शायद ही कोई ऐसी सीट होगी, जहां कांग्रेस (Delhi Congress) को लगातार सात चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा हो। पिछले तीन चुनावों में यहां के मतदाता आम आदमी पार्टी पर मेहरबान हैं।

    साहिब सिंह वर्मा, फाइल फोटो

    पहले चुनाव में साहिब सिंह वर्मा मैदान में उतरे और जीते

    इस सीट से कई रोचक राजनीतिक किस्से जुड़े हैं।1993 में अस्तित्व में आई शालीमार बाग विधानसभा के मतदाताओं ने राजधानी को मुख्यमंत्री दिया। पहले चुनाव में भाजपा से साहिब सिंह वर्मा मैदान में उतरे और विधायक बने।

    कुछ समय बाद मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना को पद छोड़ना पड़ा और उनकी जगह साहिब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। साहिब सिंह वर्मा के सांसद बनने के बाद 1998 में विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग से भाजपा ने रविंद्र बंसल को उम्मीदवार बनाया।

    दो बार चुनाव जीतकर रविंद्र बंसल ने बनाई जीत की हैट्रिक

    रविंद्र बंसल ने जीत हासिल की। इसके बाद 2003 और 2008 के चुनाव जीतकर रविंद्र बंसल ने जीत की हैट्रिक बनाई। इस सीट से लगाचार चार चुनाव जीत के बाद शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र को भाजपा का अभेद राजनीतिक किला माना जाने लगा।

    बंदना कुमारी, फाइल फोटो

    वर्ष 2013 में आम आदमी पार्टी के गठन के बाद यहां के मतदाताओं का मूड बदल गया। भाजपा के रविंद्र बंसल को हार का मुंह देखना पड़ा और मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी प्रत्याशी को जीता दिया। 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना प्रत्याशी बदला और रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा।

    10 हजार से अधिक मतों से रेखा गुप्ता को हार का सामना करना पड़ा। दूसरी बार आम आदमी पार्टी को जीता दिया। 2020 के चुनाव में भी मतदाताओं ने अपना फैसला दोहराया।

    भाजपा के नाम हार की हैट्रिक

    आम आदमी पार्टी प्रत्याशी बंदना कुमारी (Bandana Kumari) विधायक बनीं और रेखा गुप्ता को लगातार दूसरी बार हार देखनी पड़ी। रेखा गुप्ता की हार से साथ ही भाजपा के नाम हार की हैट्रिक दर्ज हो गई।

    1993 से पहले शालीमार बाग क्षेत्र शकूर बस्ती विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था, तब यहां कांग्रेस का डंका बजता था। यहां से अंतिम बार 1983 में कांग्रेस से एससी वत्स चुनाव जीते थे। शालीमार बाग विधानसभा के वजूद में आने के बाद कांग्रेस यहां से कभी चुनाव नहीं जीत पाई।

    पिछले दो चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही कमजोर रहा। 2015 में कांग्रेस प्रत्याशी 3200 और 2020 के चुनाव में केवल 2491 मत ले पाए। दिल्ली में शायद ही कोई ऐसी सीट होगी, जिस पर कांग्रेस को पिछले तीन दशक के दौरान से लगातार हार का सामना करना पड़ा हो।

    पिछले सात चुनाव में प्रमुख दलों का प्रदर्शन

    वर्ष जीते मुख्य प्रतिद्वंद्वी
    1993 साहिब सिंह वर्मा (भाजपा) एससी वत्स (कांग्रेस)
    1998 रविंद्र बंसल (भाजपा) सरला कौशिक (कांग्रेस)
    2003 रविंद्र बंसल (भाजपा) बीएस वालिया (कांग्रेस)
    2008 2008 रविंद्र बंसल (भाजपा) राम कैलाश गुप्ता (कांग्रेस)
    2013 2013 बंदना कुमारी (आप) रविंद्र बंसल (भाजपा)
    2015 2015 बंदना कुमारी (आप) रेखा गुप्ता (भाजपा)
    2020 2020 बंदना कुमारी (आप) रेखा गुप्ता (भाजपा)

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