दिल्ली के नजफगढ़ में 100 करोड़ की लागत से बना अस्पताल; डॉक्टर नहीं, सुविधाएं भी अधूरी
नजफगढ़ में 100 करोड़ की लागत से बना आरएचटीसी अस्पताल उद्घाटन के ढाई साल बाद भी चिकित्सकों की कमी और ...और पढ़ें

नजफगढ़ में 100 करोड़ की लागत से बनी आरएचटीसी अस्पताल।
HighLights
नजफगढ़ में 100 करोड़ का अस्पताल डॉक्टरों के बिना
अक्टूबर 2023 में उद्घाटन, पर सुविधाएं अधूरी
रेडियोलॉजी विभाग भी शुरू नहीं हो पाया है
गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। देश की राजधानी, जहां भारत की स्वास्थ्य नीतियों का खाका बुना जाता है, वहीं केंद्र सरकार का एक अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
दिल्ली देहात के प्रवेश द्वार माने जाने वाले नजफगढ़ में 100 करोड़ की लागत से बनी आरएचटीसी (रूरल हेल्थ ट्रेनिंग सेंटर) अस्पताल की भव्य इमारत अक्टूबर 2023 से चिकित्सकों के लिए तरस रही है। विडंबना देखिए, कई बार विज्ञापन निकालने के बावजूद भी कोई भी चिकित्सक यहां आवेदन देने तक को तैयार नहीं है।
तीन बार निकाला विज्ञापन, नहीं मिला आवेदन
अस्पताल में सीनियर रेजिडेंट चिकित्सकों के 33 पद स्वीकृत हैं। इन पदों को भरने के लिए अस्पताल प्रशासन ने एक बार नहीं बल्कि तीन बीन बार विज्ञापन निकाले। लेकिन तीन बार की कोशिश का नतीजा कुछ भी नहीं निकला। अस्प्ताल प्रशासन के अनुसार केवल तीन लोगों ने यहां नौकरी के लिए आवेदन किए। इनमें दो का चयन हुआ। यानि 31 पद अभी भी नियुक्ति की बाट जोह रहे हैं। अस्पताल में स्पेशलिसट चिकित्सकों के 17 स्वीकृत पदों में केवल आठ पद ही भरे हैं। नर्स के कुल 36 पदों में 20 पद रिक्त हैं। पारा मेडिकल स्टाफ की भी यहां घोर किल्लत है।
रेडियोलॉजी विभाग शुरू हो, इसके लिए पांच बार निकाला टेंडर, चार बार खाली हाथ
विडंबना का चक्र केवल चिकित्सकों के अकाल के मुद्दे पर ही खत्म नहीं होता। अस्पताल में रेडियोलाजी विभाग शुरू हो, इसके लिए जरुरी सुविधाओं के विकास के लिए पांच बार टेंडर निकाला गया, लेकिन चार बार कोई भी एजेंसी यहां काम करने को आगे नहीं आई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पांचवीं कोशिश में कामयाबी मिली है। उम्मीद है कि इस महीने टेंडर को अवार्ड किया जाएगा। लेकिन अभी तक के अनुभव को देखते हुए यह उम्मीद हकीकत में तब्दील हो, तभी कुछ बनेगी।
अक्टूबर 2023 में हुआ था उद्घाटन
वर्ष 2023 के अक्टूबर महीने में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा मनसुख मांडविया ने 100 करोड़ की लागत से बने 183 बिस्तरों की क्षमता वाले आरएचटीसी (रूरल हेल्थ ट्रेनिंग सेंटर) अस्पताल का नजफगढ़ में उदघाटन किया। तब यह कहा गया था कि 70 गांव व नजफगढ़ व आसपास स्थित कॉलोनी में रहने वाले 13 लाख की आबादी को अस्पताल निर्माण से फायदा होगा। अब जबकि अस्पताल के उदघाटन को ढाई वर्ष बीतने वाले हैं, हकीकत यह है कि यहां स्वास्थ संबंधी सुविधाएं ओपीडी से आगे नहीं बढ़ सकी हैं।
किन किन सुविधाओं का यहां अभाव
- रेडियोलॉजी
- ब्लड स्टोरेज सेंटर
- आइपीडी
- लेबर रुम
- आपरेशन थिएटर
- आइसीयू
आखिर क्यों नहीं मिल रहे चिकित्सक
अस्पताल सूत्र बताते हैं कि नजफगढ़ में काम करने को कोई सीनियर रेजिडेंट या स्पेशलिस्ट राजी नहीं हो रहा है। आमतौर पर चिकित्सक एम्स या सफदरजंग जैसे बड़े अस्पतालों में नौकरी करना चाहते हैं। अभ्यर्थियों का मानना है कि यह जगह दिल्ली में मुख्य इलाके से काफी दूर है, ऐसे में वे निजी अस्प्ताल का रुख करना पसंद करते हैं।
अस्पताल शुरू करवाना ही मेरा लक्ष्य
क्षेत्र की लाखों की आबादी के लिए उम्मीद की किरण यह अस्प्ताल शुरू हो, इसके लिए नजफगढ़ निवासी बुजुर्ग चौ करतार सिंह शुरू से ही प्रयासरत है। इसके लिए ये कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। इनका कहना है कि हाई कोर्ट में दी गई जानकारी में अस्प्ताल प्रशासन ने कोर्ट को बताया है कि चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के उपाय पर काम हो रहा है। अस्प्ताल पूरी तरह शुरू हो, इसके लिए प्रयास चल रहे हैं।
