29 साल बाद पूरी होगी दिल्ली के इस इंडस्ट्रियल एरिया की योजना, 920 एकड़ में होगा विकास; 15 लाख रोजगार का अनुमान
दिल्ली के कंझावला में 29 साल से लंबित 920 एकड़ के औद्योगिक क्षेत्र के विकास की योजना अब गति पकड़ ...और पढ़ें

दिल्ली के कंझावला में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की योजना करीब 29 साल बाद अब जमीन पर उतरने की उम्मीद जगी है। एआई इमेज
HighLights
कंझावला औद्योगिक क्षेत्र का 29 साल बाद विकास शुरू।
920 एकड़ में फैलेगा, 15 लाख रोजगार सृजित होंगे।
डीएसआईआईडीसी ने चारदीवारी निर्माण के लिए टेंडर जारी किया।
वीके शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली के कंझावला में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की योजना करीब 29 साल बाद अब जमीन पर उतरने की उम्मीद जगी है। वर्ष 1997 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस परियोजना की रूपरेखा तैयार की थी, लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकारों के कार्यकाल में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अब दिल्ली में फिर से भाजपा की सरकार बनने के बाद करीब 920 एकड़ में प्रस्तावित इस औद्योगिक क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया शुरू करने की कवायद तेज हुई है। पहली बार जमीन की चारदीवारी के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया गया है।
योजना 1997 में शुरू करने का निर्णय हुआ
दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने इसके विकास की प्रक्रिया तेज करते हुए 21.71 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। इसमें चारदीवारी, सुरक्षा द्वार, सूचना बोर्ड और सुरक्षा कक्ष का निर्माण शामिल है। कांझावला में विकास केंद्र बनाने की योजना 1997 में शुरू करने का निर्णय हुआ था।
परियोजना को लेकर अड़चनें दूर कर लीं
इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 2005 में शुरू हुई मगर आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में 2008 में अधिग्रहण का आदेश जारी हुआ, लेकिन किसान इसके विरोध में आ गए। भूमि के मालिकाना हक, चकबंदी और मुआवजे से जुड़े विवाद अदालतों तक पहुंचे। इस परियोजना को लेकर करीब 30 याचिकाएं दिल्ली हाई काेर्ट में लगाई गईं। जिससे परियोजना को आगे बढ़ाने में विलंब हुआ। अधिकारियों की मानें तो उसके बाद परियोजना को लेकर अड़चनें दूर कर ली गई थीं।
रिपोर्ट छह महीने में देने की बात कही
मई 2023 में उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद 920 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर गई थी। इसी समय डीएसआइआइडीसी ने परियोजना के बेहतर उपयोग और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करने के लिए सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
सलाहकार को बाजार की मांग, निवेशकों की रुचि, संभावित उद्योगों और आर्थिक माडल का अध्ययन करना था। रिपोर्ट छह महीने में देने की बात कही गई थी। मगर सह सब प्रक्रिया अागे नहीं बढ़ सकी। उस समय इस परियोजना से जुड़े रहे एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि उस समय परियोजना के आगे नहीं बढ़ने का प्रशासनिक कारण रहा।
यहां इस तरह के उद्योग लगने हैं
- सूचना प्रौद्योगिकी और मीडिया
- खाद्य प्रसंस्करण
- इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार
- कपड़ा उद्योग
- बिजली के उपकरण
- वाहन उद्योग
- फर्नीचर और मशीनरी निर्माण
15 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान
यहां लगने वाले उद्योगों से करीब 15 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली के आवासीय और व्यावसायिक इलाकों में चल रही अनधिकृत औद्योगिक इकाइयों को नियोजित औद्योगिक क्षेत्र में स्थान उपलब्ध कराना भी है।
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