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वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारी पर सवाल, 2009 के मानकों के भरोसे देश; नए नियमों का कब तक होगा इंतजार

Published: Tue, 27 Oct 2026 08:10 AM (IST)

भारत में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों की समीक्षा पांच साल से अधिक समय ...और पढ़ें

दिल्ली-एनसीआर में अब भी साल 2009 के तरीकों से ही वायु गुणवत्ता जांचने से वर्तमान समस्या का नहीं मिल पा रहा तोड़। प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली-एनसीआर में अब भी साल 2009 के तरीकों से ही वायु गुणवत्ता जांचने से वर्तमान समस्या का नहीं मिल पा रहा तोड़। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. एनएएक्यूएस समीक्षा पांच साल से अधिक समय से अधूरी।

  2. आईआईटी कानपुर की संशोधित रिपोर्ट अभी विचाराधीन है।

  3. 2009 के पुराने वायु गुणवत्ता मानक ही लागू हैं।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। देश में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए हवा की गुणवत्ता के मानक बदलने की प्रक्रिया पांच साल से अधिक समय बाद भी अधूरी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आरटीआइ जवाब के मुताबिक, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) की समीक्षा के लिए आईआईटी कानपुर की ओर से सौंपी गई संशोधित रिपोर्ट अब भी विचाराधीन है।

कब तय होंगे नए मानक?

इस बीच देश में वर्ष 2009 में अधिसूचित वायु गुणवत्ता मानक ही लागू हैं। नए मानकों को अंतिम रूप देने और अधिसूचित करने की समयसीमा भी स्पष्ट नहीं है। मालूम हो कि दैनिक जागरण भी इसी मुद्दे को उठाते हुए 19 दिसंबर 2025 के अंक में इस पर विस्तृत खबर प्रकाशित कर चुका है।

मानकों की समीक्षा में देरी पड़ रही भारी

यह स्थिति तब है, जब वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। पीएम 2.5 एवं पीएम 10 जैसे प्रदूषकों की स्वीकार्य सीमा तय करने वाले राष्ट्रीय मानक प्रदूषण के आकलन, नियंत्रण की नीतियों और सरकारी कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में इन मानकों की समीक्षा में देरी का मामला खासतौर पर दिल्ली सहित एनसीआर जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट जमा, फिर भी समीक्षा जारी

सीपीसीबी ने सितंबर 2026 को पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता की आरटीआइ जवाब में बताया कि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों की समीक्षा के लिए आईआईटी कानपुर को 28 दिसंबर 2021 को परियोजना सौंपी गई थी। इसके तहत आईआईटी कानपुर को अब तक 19.64 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

अब तक पांच साल से अधिक समय बीता

आईआईटी कानपुर ने 16 दिसंबर 2025 को तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद संचालन समिति और सीपीसीबी ने रिपोर्ट की समीक्षा कर टिप्पणियां दीं। इन टिप्पणियों को शामिल करते हुए आईआईटी कानपुर ने संशोधित रिपोर्ट जमा की, जो आरटीआई के जवाब के समय भी समीक्षा के अधीन थी। इस तरह तकनीकी रिपोर्ट जमा होने के करीब नौ महीने बाद भी नए मानकों को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। परियोजना की शुरुआत से अब तक पांच साल से अधिक समय बीत चुका है।

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दैनिक जागरण में 19 दिसंबर 2025 के अंक में प्रकाशित खबर। जागरण

विशेषज्ञ समिति ने की समीक्षा

सीपीसीबी के अनुसार, रिपोर्ट की समीक्षा के लिए गठित संचालन समिति में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, सीपीसीबी और टेरी के विशेषज्ञ शामिल हैं।

समिति ने रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अपनी टिप्पणियां आईआईटी कानपुर को भेजी थीं। इसके बाद संशोधित रिपोर्ट तैयार की गई। हालांकि, समीक्षा की मौजूदा स्थिति से यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रक्रिया कब पूरी होगी और नए मानकों को कब अधिसूचित किया जाएगा।

स्वास्थ्य जोखिमों और पारदर्शिता पर भी सवाल

आरटीआइ के जरिए उठाए गए सवालों में नए मानकों को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए स्वास्थ्य संबंधी आकलनों, विशेषज्ञ समितियों की बैठकों के विवरण और रिपोर्ट के सार्वजनिक किए जाने की स्थिति जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक, रिपोर्ट की समीक्षा अभी जारी है, लेकिन नए मानकों की अधिसूचना के लिए कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है। 

दिल्ली और एनसीआर में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण गंभीर समस्या बनता है। ऐसे में सवाल सिर्फ मानकों की समीक्षा का नहीं, बल्कि इस प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने का भी है।

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