सर्दियों में दिल्ली एयरपोर्ट पर घटेगा इंतजार? कोहरे में तीसरे रनवे और स्काइकास्ट तकनीक की बड़ी परीक्षा
दिल्ली के आइजीआइ एयरपोर्ट पर सर्दियों में कोहरे से होने वाली उड़ानों की देरी से निपटने के लिए स्काइकास्ट और ...और पढ़ें
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कोहने में दिल्ली एयरपोर्ट पर तीसरे रनवे की इस बार होगी परीक्षा। फोटो: आर्काइव
HighLights
स्काइकास्ट मौसम पूर्वानुमान से एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मदद।
तीसरे रनवे का पुनर्वास, परिचालन क्षमता में वृद्धि।
नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे Z1, विमानों की तेज निकासी।
गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। सर्दियों में देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट आईजीआई (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट) पर कोहरा घना होते ही उड़ानों की समय-सारणी बिगड़ने लगती है।
एक विमान की लैंडिंग में देरी का असर दूसरी उड़ानों पर भी पड़ सकता है। इस बार डायल के सामने चुनौती दोहरी है। मौसम का पूर्वानुमान बेहतर करने के लिए इसी साल 29 मई को शुरू स्काइकास्ट की उपयोगिता परखी जाएगी।
वहीं तीसरे रनवे के पुनर्वास के बाद बढ़ी परिचालन क्षमता की भी परीक्षा होगी। सवाल है कि इन बदलावों से यात्रियों का इंतजार कितना घटेगा।
तीन घंटे पहले मौसम का संकेत
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, स्काइकास्ट हवा की गति और दिशा, वायुमंडलीय नमी, अशांति और कोहरे की संरचना पर नजर रखने वाले आधुनिक उपकरणों को एकीकृत करता है।
इसमें रडार विंड प्रोफाइलर, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, सोडार और लिडार सीलोमीटर शामिल हैं। यह प्रणाली अल्पकालिक पूर्वानुमान में मदद करती है, ताकि मौसम बिगड़ने की आशंका होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयरलाइंस पहले से योजना बना सकें।
हालांकि, पूर्वानुमान मिलना और प्रतिकूल परिस्थितियों में विमान को सुरक्षित उतार पाना अलग बातें हैं। इसका वास्तविक लाभ इस बात से तय होगा कि चेतावनी कितनी सटीक रही और उसके आधार पर परिचालन संबंधी फैसले कितने प्रभावी रहे।
दुनिया के अन्य एयरपोर्ट पर इस तरह की प्रणाली की बात करें तो हांगकांग एयरपोर्ट पर हवा में अचानक बदलाव और विंड-शियर का पता लगाने के लिए डाप्लर रडार, लिडार और विंड प्रोफाइलर इस्तेमाल किए जाते हैं।
वहां की मौसम वेधशाला के अनुसार, विंड-शियर की पहचान दर करीब 90 प्रतिशत रही है। यह मौसम संबंधी खतरे की पहचान का आंकड़ा है, उड़ानों की देरी में कमी का नहीं।
इसलिए दिल्ली में स्काइकास्ट की सफलता भी इसी तरह पूर्वानुमान की सटीकता और वास्तविक परिचालन नतीजों से मापनी होगी।
तीसरे रनवे पर भी बड़े बदलाव
रनवे 11आर/29एल को फरवरी 2026 में पुनर्वास के लिए बंद किया गया और 20 सितंबर को दोबारा चालू किया गया। इस दौरान रनवे की सतह और पेवमेंट का नवीनीकरण, करीब 2,000 एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग उपकरणों को दोबारा लगाना और नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे जेड1 बनाना शामिल था।
परियोजना में नए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) से जुड़े कार्य भी किए गए।
जेड1 का उद्देश्य लैंडिंग के बाद विमान को रनवे से तेजी से बाहर निकालना है। इससे रनवे खाली होने का समय घट सकता है। वहीं, लाइटिंग और आईएलएस कम दृश्यता में सुरक्षित संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नई तकनीक और बेहतर बुनियादी ढांचा उम्मीद जरूर जगाते हैं, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट की इस सर्दी की अग्निपरीक्षा का फैसला यात्रियों को मिलने वाली वास्तविक राहत से ही होगा।
सर्दियों से पहले एयरसाइड पर हुए बदलाव
रनवे का पुनर्वास: तीसरे रनवे 11आर/29एल की सतह और पेवमेंट का नवीनीकरण।
करीब 2,000 लाइटिंग उपकरण: एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग उपकरणों को हटाकर दोबारा लगाया गया।
नया टैक्सीवे जेड1: लैंडिंग के बाद विमान को रनवे से जल्दी बाहर निकालने के उद्देश्य से निर्माण।
आईएलएस से जुड़े कार्य: कम दृश्यता में उपकरण आधारित लैंडिंग के लिए नई प्रणाली की स्थापना और सत्यापन संबंधी काम।
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