दिल्ली में अप्रैल 2020 से पहले रजिस्टर्ड गाड़ियों की नो एंट्री, कार ही नहीं 1 नवंबर से बाइक तक पर बैन
दिल्ली में 1 नवंबर से बीएस-6 उत्सर्जन मानक से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगेगा, जिससे एनसीआर के ...और पढ़ें

दिल्ली में प्रदूषण के मद्देनजर एक नंवबर से अप्रैल 2020 से पहले रजिस्टर्ड गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। फोटो: एआई जनरेटेड
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण से दिल्ली का दम घुटता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए 1 नवंबर से बीएस-6 मानक से नीचे की पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है।
यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगा। इससे NCR के करीब 12 लाख वाहनों के चालकों के साथ परिवहन कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
गुरुग्राम से गाजियाबाद तक के वाहन आएंगे दायरे में
इस प्रतिबंध का असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद समेत NCR के उन शहरों से दिल्ली आने वाली गाड़ियों पर पड़ सकता है, जिनके वाहन बीएस-6 मानक के अनुरूप नहीं हैं।
इसमें निजी कारों के अलावा माल ढोने वाले वाणिज्यिक वाहन और पहली बार दोपहिया वाहन भी शामिल होंगे। प्रतिबंध केवल पेट्रोल और डीजल वाहनों पर लागू होगा। परिवहन विभाग प्रतिबंध का पालन कराने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
वाहनों की पहचान के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों और अन्य निगरानी प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा। सीमाओं पर करीब 300 कर्मियों की तैनाती की भी तैयारी है।
ढाई लाख ट्रकों की आवाजाही होगी प्रभावित
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने बीएस-4 वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से करीब ढाई लाख ट्रकों की दिल्ली में आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
इसका असर परिवहन कारोबार, वाहन संचालकों की आजीविका और दिल्ली में माल की आपूर्ति पर पड़ने की आशंका है।
वाहन की फिटनेस के आधार पर छूट देने की मांग
परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त अनिल छिकारा ने प्रतिबंध की नीति की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल वाहन के निर्माण वर्ष या उत्सर्जन श्रेणी के आधार पर प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक समाधान नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि अच्छी स्थिति में चल रहे बीएस-4 वाहनों को अधिकृत स्वचालित परीक्षण केंद्रों पर प्रदूषण और यांत्रिक फिटनेस की जांच के बाद राहत दी जानी चाहिए।
2010 से 2020 तक लागू रहा बीएस-4 मानक
भारत में बीएस-4 उत्सर्जन मानक 1 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2020 तक लागू रहा। इसके बाद 1 अप्रैल 2020 से नए वाहनों के लिए बीएस-6 मानक लागू किया गया।
बीएस-4 श्रेणी के कुछ पुराने वाहन निर्धारित आयु सीमा भी पूरी कर चुके हैं। हालांकि, 2018 से 2020 के बीच पंजीकृत कई वाहन अभी अच्छी स्थिति में हैं।
गुरुग्राम-फरीदाबाद से रोज आती हैं 2 लाख गाड़ियां
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम और फरीदाबाद से प्रतिदिन करीब दो लाख वाहन दिल्ली आते हैं। इनमें 70 प्रतिशत तक वाहन बीएस-6 मानक से नीचे के बताए गए हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आने वाले बीएस-6 से नीचे के वाहनों की संख्या चार लाख से अधिक है। इनमें बीएस-4 वाहनों की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा है और बड़ी संख्या निजी पेट्रोल कारों की है।
वहीं, गाजियाबाद से भी करीब चार लाख बीएस-6 मानक से नीचे के वाहन दिल्ली आते-जाते हैं।
प्रतिबंध लागू होने पर इन शहरों से रोजाना दिल्ली आने वाले नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और माल की आपूर्ति करने वाले वाहन संचालकों को अपने आवागमन की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है।
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