तकनीकी पेंच में फंसा दिल्ली का चंदगीराम अखाड़ा फ्लाईओवर, एक साल बाद भी काम शुरू नहीं
राजधानी के चंदगीराम अखाड़ा लालबत्ती पर प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना एक साल बाद भी तकनीकी अड़चनों के कारण आगे नहीं बढ़ पाई है।

183 करोड़ के फ्लाईओवर का डिजाइन अटका (Edited By AI)
HighLights
चंदगीराम अखाड़ा फ्लाईओवर परियोजना एक साल से अटकी।
एनसीआरटीसी की करनाल लाइन तकनीकी अड़चन बनी।
पीडब्ल्यूडी और एनसीआरटीसी में डिजाइन पर सहमति नहीं।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में चंदगीराम अखाड़ा लालबत्ती पर लगने वाले भारी जाम से वाहन चालकों को फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
इस लालबत्ती पर फ्लाईओवर बनाने की योजना पर दिल्ली सरकार आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण परियोजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए हैं।
योजना को नहीं मिली मंजूरी
इसके बावजूद फ्लाईओवर के डिजाइन को लेकर सहमति नहीं बन पाने से योजना की मंजूरी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।दरअसल, चंदगीराम अखाड़ा लालबत्ती पर यातायात का दबाव कम करने के लिए फ्लाईओवर बनाने की योजना तैयार की गई है।
इसके निर्माण से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुगम होने और जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है। दिल्ली सरकार इस परियोजना के लिए 183 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दे चुकी है। इसके बावजूद एक वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
एनसीआरटीसी की करनाल लाइन
इस परियोजना में सबसे बड़ी चुनौती फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाली एनसीआरटीसी की करनाल लाइन है। रेल लाइन और फ्लाईओवर के निर्माण से जुड़ी तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन तैयार करना जरूरी है।
ऐसे में लोक निर्माण विभाग और एनसीआरटीसी के बीच समन्वय के साथ डिजाइन को अंतिम रूप देना होगा। अभी इस बिंदु पर सहमति नहीं बन पाने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरआरटीएस की योजना के डिजाइन को अभी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। डिजाइन को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही विभाग इस दिशा में आगे की कार्रवाई कर सकेगा। इस संबंध में आरआरटीएस के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और उनके साथ विचार-विमर्श भी जारी है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में देरी होने की आशंका है। हालांकि, विभाग की ओर से योजना को आगे बढ़ाने में कोई देरी नहीं की जा रही है।
