Explainer: एक ही शहर, एक ही हवा, फिर AQI अलग-अलग क्यों? समझिए CPCB और IQAir का अंतर; प्रदूषण मापने का तरीका
Delhi-NCR में CPCB और IQAir के AQI में अंतर हवा की गुणवत्ता मापने और सूचकांक में बदलने के अलग-अलग तरीकों ...और पढ़ें

कई बार एक ही समय पर दोनों के एक्यूआई में बड़ा अंतर दिखाई देता है। एआई इमेज
HighLights
भारत का AQI 8 प्रदूषकों, 24 घंटे औसत पर आधारित।
IQAir अमेरिकी पैमाने, 6 प्रदूषकों, प्रति घंटे औसत का उपयोग।
दोनों प्रणालियों में माप अवधि, सूचकांक बदलने का तरीका भिन्न।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति जानने के लिए लोग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के एक्यूआई के साथ स्विट्जरलैंड की कंपनी आईक्यूएयर के आंकड़े भी देखते हैं। कई बार एक ही समय पर दोनों के एक्यूआई में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
इसकी वजह हवा की गुणवत्ता नहीं, बल्कि उसे मापने और सूचकांक में बदलने का अलग-अलग तरीका है। भारत में सीपीसीबी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तैयार फ्रेमवर्क पर राष्ट्रीय एक्यूआई तैयार करता है, जबकि आईक्यूएयर अमेरिकी एक्यूआई पैमाने का उपयोग करता है। दोनों में ही प्रदूषण मापने की अवधि और निगरानी केंद्रों के आंकड़ों को जोड़ने का तरीका भी अलग है।
भारत में आठ प्रदूषकों से तय होता है एक्यूआई
भारत में राष्ट्रीय एक्यूआई की शुरुआत 2014 में हुई थी। इसके तहत पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, अमोनिया और लेड के आंकड़ों का इस्तेमाल होता है।
हर प्रदूषक की मात्रा को तय मानकों के आधार पर अलग-अलग सब-इंडेक्स में बदला जाता है। इनमें जिसका सब-इंडेक्स सबसे अधिक होता है, वही उस निगरानी केंद्र का एक्यूआई बनता है। यानी सभी प्रदूषकों का औसत निकालकर एक्यूआई तय नहीं होता।
एक्यूआई के लिए कम से कम तीन प्रदूषकों के आंकड़े जरूरी हैं। पीएम 2.5 और पीएम 10 के लिए सामान्यत: 24 घंटे का औसत लिया जाता है, जबकि कार्बन मोनोआक्साइड और ओजोन के लिए आठ घंटे का औसत इस्तेमाल होता है।
एनसीआर में कैसे बनता है आंकड़ा
दिल्ली में सीपीसीबी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के निगरानी केंद्रों से आंकड़े लिए जाते हैं। प्रत्येक केंद्र का एक्यूआई अलग निकाला जाता है। दिल्ली सरकार के पोर्टल के अनुसार, शहर का एक्यूआई उस घंटे आंकड़े देने वाले केंद्रों के एक्यूआई का औसत लेकर तैयार होता है। एनसीआर के गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के आंकड़े अलग-अलग शहरों की स्थिति बताते हैं। इसलिए दिल्ली का एक्यूआई पूरे एनसीआर की हवा का प्रतिनिधि नहीं है।
भारत में AQI की कितनी श्रेणियां हैं?
भारत में एक्यूआई की छह श्रेणियां हैं। शून्य से 50 तक अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर श्रेणी मानी जाती है।
आईक्यूएयर अमेरिकी पैमाने पर देता है आंकड़ा
आईक्यूएयर अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (यूएस ईपीए) के एक्यूआई पैमाने का इस्तेमाल करता है। इसमें छह प्रदूषकों के आंकड़ों से सूचकांक तैयार होता है। कंपनी सरकारी निगरानी केंद्रों के साथ कम लागत वाले सेंसरों से मिले आंकड़ों का भी उपयोग करती है।
इसका एक्यूआई प्लस मुख्य रूप से पिछले एक घंटे के औसत प्रदूषण स्तर पर आधारित है। शहर का आंकड़ा तैयार करने में निगरानी केंद्रों के प्रति घंटे के प्रदूषण स्तर का मध्य मान (मीडियन) लिया जाता है।
आईक्यूएयर ने मई 2024 से अमेरिकी एक्यूआई के संशोधित मानक लागू किए। इसमें पीएम 2.5 के लिए अच्छी श्रेणी की ऊपरी सीमा 12 से घटाकर नौ माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर कर दी गई।
औसत अवधि और पैमाने से बदलता है नंबर
दोनों प्रणालियों में सबसे बड़ा अंतर प्रदूषण की मात्रा को एक्यूआई में बदलने के मानकों और औसत अवधि का है। भारत में पीएम 2.5 और पीएम 10 के लिए 24 घंटे का औसत महत्वपूर्ण है, जबकि आईक्यूएयर का एक्यूआई प्लस एक घंटे के आंकड़ों पर अधिक निर्भर करता है। इसलिए प्रदूषण तेजी से बढ़ने या घटने पर आईक्यूएयर का आंकड़ा जल्दी बदलता है, जबकि भारतीय एक्यूआई में बदलाव अपेक्षाकृत धीरे दिखता है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।