दिल्ली में सड़क किनारे अवैध पेट्रोल की खुलेआम बिक्री बनी मुसीबत, आबादी वाले इलाकों में हादसे को दावत
दिल्ली में सड़क किनारे अवैध पेट्रोल की बिक्री एक बड़ी समस्या बन गई है, खासकर आबादी वाले क्षेत्रों में। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की निष्क्रियता के चलते यह कारोबार खुलेआम चल रहा है, जिससे निवासियों में डर का माहौल है। तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि किसी भी संभावित हादसे को रोका जा सके।

संगम विहार स्थित रतिया मार्ग पर एक दुकान से बोतल में पेट्रोल खरीदकर बाइक की टंकी में डालता युवक। जागरण
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। महरौली-बदरपुर रोड पर पेट्रोल पंप के अभाव के चलते संगम विहार, देवली और खानपुर जैसी बड़े और अनधिकृत इलाकों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विभागीय मिलीभगत के चलते गली-गली में अवैध रूप से पेट्रोल बिक रहे हैं।
घनी आबादी और संकरे रास्तों के चलते हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। शनिवार को तिगड़ी एक्सटेंशन में ऐसी ही एक हादसे में चार लोगों को जान गंवानी पड़ी। ऐसे हादसों के बावजूद न तो कभी पुलिस कोई एक्शन लेती है और न ही कभी खाद्य आपूर्ति विभाग जांच के लिए पहुंचता है। कार्रवाई न होने का बड़ा कारण अवैध धंधे के चलते होने वाली मोटी कमाई है, जिसका हिस्सा संबंधितों तक पहुंचता रहता है।
दक्षिणी दिल्ली में रतिया मार्ग हो या मंगल बाजार रोड या फिर खानपुर एक्सटेंशन का मुख्य मार्ग। इन पर छिटपुट दुकानों पर तो अवैध रूप से पेट्रोल बिकते हैं। पर असली खेल मेन सड़कों से लगी गलियों के भीतर चलता है। अंदर दुकानों पर परचून से लेकर जूते-चप्पल तक की दुकानों में आसानी से पेट्रोल मिल रहा है।
परचून की दुकान से खरीदा पेट्रोल
रतिया मार्ग पर ही एक गली के भीतर दोपहर में परचून की दुकान पर दो बाइक सवार आकर रुके। वो बाइक पर घूम-घूमकर सामान बेचने वाले थे। पहुंचते ही दुकानदार से दो लीटर पेट्रोल मांगा। दुकानदार ने भी एक-एक लीटर की दो बोतलें थमा दीं। दोनों ने अपनी-अपनी बाइक में पेट्रोल डालकर बोतल वापस कर दी। उन्होंने दोनों बोतल के 240 रुपये दुकानदार को दिए।
यानी जो पेट्रोल पंप पर जो पेट्रोल रविवार को 94.77 रुपये लीटर मिल रहा था, वो यहां 120 रुपये लीटर हो गया। प्रति लीटर लगभग 25 रुपये ज्यादा लिए जाने के सवाल पर दुकानदार ने बताया कि पेट्रोल पंप से ढोकर लाने में भी तो कुछ खर्च आता है। बीट वालों का भी 6,000 महीना बंधा है। विभाग को भी लगभग इतने ही देने पड़ते हैं।
सात हजार रुपये दुकान का किराया है। सब इसी में से मैनेज करना पड़ता है। ये खर्च न हो तो हम पांच रुपये रखकर ही लोगों को पेट्रोल दे दें। लाइसेंस के बारे में पूछने पर दुकानदार ने बताया कि यहां ऐसे ही चलता है। लाइसेंस कौन देखता है। बड़ा इलाका है। लगभग सभी के पास बाइक है। पेट्रोल पंप बहुत दूर-दूर हैं। रास्ते में गाड़ी बंद हुई तो धकेलकर जाना पड़ेगा। इलाके में ऐसी बहुत सी दुकानें हैं। कोई लाइसेंस नहीं रखता।
बाहरी दिल्ली में भी यही हाल
सुल्तानपुरी, किराड़ी, बुध विहार, विजय विहार, बेगमपुर के अलावा अन्य स्थानों पर दुकानदार खुलेआम पेट्रोल बेच रहे हैं। सड़क किनारे बोतलों में पेट्रोल भरकर बेच रहे हैं। कोई भी आसानी से इन जगहों से पेट्रोल खरीद लेता है। पेट्रोल पंप के मुकाबले प्रति लीटर 20 से 30 रुपये ज्यादा लेकर ये आसानी से पेट्रोल किसी को भी दे देते हैं। खुलेआम बेचे जाने के बाद भी इनके खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। इस तरह से ज्वलनशील पदार्थ खुलेआम बेचा जाना सुरक्षा के मद्देनजर ठीक नहीं है।
अधिकारियों से कराई जाएगी जांच
दक्षिणी जिले के जिलाधिकारी, डीसी और डीसीपी को अपने स्तर पर जांच कराने के लिए कहा गया है। पेट्रोल की अवैध बिक्री में लिप्त लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभागों की जवाबदेही तय करते हुए सख्ती से इसकी रोकथाम सुनिश्चित कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के घटना की पुनरावृत्ति न हो।
रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद, दक्षिणी दिल्ली।

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