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IGI एयरपोर्ट पर 500 फीट से नीचे आते ही पक्षियों का गहराता है खतरा, 5 साल में 695 बार बर्ड स्ट्राइक

Published: Mon, 19 Oct 2026 06:55 AM (IST)

आईजीआई एयरपोर्ट पर एमिरेट्स की उड़ान से पक्षी टकराने की घटना ने विमान सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। 2020 ...और पढ़ें

सवाल है कि आखिर एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी विमानों के लिए इतना बड़ा जोखिम क्यों बन रही है? एआई इमेज

सवाल है कि आखिर एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी विमानों के लिए इतना बड़ा जोखिम क्यों बन रही है? एआई इमेज

HighLights

  1. आईजीआई पर 695 बर्ड स्ट्राइक, 70% 500 फीट से नीचे।

  2. कचरा और मांस अपशिष्ट पक्षियों को आकर्षित करते हैं।

  3. स्पैरो नेट सिस्टम और बाहरी कचरा प्रबंधन आवश्यक।

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। आईजीआई एयरपोर्ट पर शनिवार को एमिरेट्स की उड़ान ईके517 से पक्षी टकराने और विमान का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की घटना ने विमान सुरक्षा से जुड़े खतरे को फिर उजागर किया है।

बोइंग 777-300 विमान में चालक दल सहित 357 लोग सवार थे। मरम्मत के कारण दुबई की वापसी उड़ान 15 घंटे से अधिक विलंबित हुई। सवाल है कि आखिर एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी विमानों के लिए इतना बड़ा जोखिम क्यों बन रही है?

500 फीट से नीचे क्यों बढ़ जाता है खतरा

आईजीआई एयरपोर्ट पर 2020 से जून 2025 तक बर्ड हिट की 695 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें करीब 70 फीसदी घटनाएं टेकआफ और लैंडिंग के दौरान 500 फीट से कम ऊंचाई पर हुईं। इस ऊंचाई पर पायलट के पास पक्षी से बचने के लिए सीमित समय होता है। पक्षी के विमान के इंजन, विंडस्क्रीन या अगले हिस्से से टकराने पर तकनीकी जांच और मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर स्थिति में उड़ान रोकनी पड़ सकती है।

नए अध्ययन में भी सामने आया कम ऊंचाई का जोखिम

वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया और सलीम अली सेंटर फार आर्निथोलाजी एंड नेचुरल हिस्ट्री के अध्ययन में सात भारतीय एयरपोर्ट पर 2012 से 2024 के बीच दर्ज 634 वन्यजीव टकराव की घटनाओं का विश्लेषण किया गया।

इनमें 629 घटनाएं पक्षियों से जुड़ी थीं और 98 फीसदी से अधिक टकराव कम ऊंचाई पर हुए। यह अध्ययन दिल्ली एयरपोर्ट विशेष पर नहीं था, लेकिन टेकआफ और लैंडिंग के दौरान खतरे की गंभीरता समझाता है।

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सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

छमाही में 41 मामले दर्ज किए गए

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जुलाई 2025 में राज्यसभा में साझा आंकड़ों के मुताबिक, आईजीआई एयरपोर्ट पर 2020 से जून 2025 तक पक्षियों से टकराने की 695 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 2023 में 185 और 2024 में 130 मामले सामने आए, जबकि 2025 की पहली छमाही में 41 मामले दर्ज किए गए थे।

कचरा और मीट वेस्ट बन रहे आकर्षण

बर्ड स्ट्राइक केवल पक्षी और विमान की टक्कर नहीं, बल्कि आसपास के पर्यावरण और कचरा प्रबंधन से जुड़ी सुरक्षा चुनौती भी है। आईजीआई एयरपोर्ट के आसपास खुले में कचरा, मांस के अवशेष, जलभराव और दाना डालने की गतिविधियां पक्षियों को भोजन उपलब्ध कराती हैं। रंगपुरी, द्वारका और वसंत कुंज के कुछ इलाकों में ऐसी समस्याएं रिपोर्ट की गई हैं। पक्षियों की मौजूदगी बढ़ने से रनवे और विमान के एप्रोच मार्गों के आसपास जोखिम बढ़ सकता है।

स्पैरो नेट सिस्टम की तैयारी

बर्ड स्ट्राइक रोकने के लिए डायल स्पैरो नेट सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, एयरपोर्ट के भीतर निगरानी के साथ बाहरी इलाकों में कचरा और मांस अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण भी जरूरी है।

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