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IGI एयरपोर्ट पर बर्ड हिट का बड़ा खतरा, 5 साल में सामने आए 600 मामले; केवल पटाखों के भरोसे नहीं टलेगा हादसा

Published: Mon, 24 Aug 2026 11:28 PM (IST)

पटना में एयर इंडिया की उड़ान में बर्ड हिट के बाद दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर पक्षी टकराने की बढ़ती ...और पढ़ें

दिल्ली एयरपोर्ट पर बर्ड हिट का खतरा। फोटो: एआई जनरेटेड

दिल्ली एयरपोर्ट पर बर्ड हिट का खतरा। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. आईजीआई एयरपोर्ट पर बर्ड हिट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं

  2. एयरपोर्ट के आसपास खुले कचरे और जलभराव से पक्षी आकर्षित

  3. नियमों की अनदेखी और लापरवाही से विमानों को खतरा

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। सोमवार सुबह दिल्ली से पटना पहुंची एअर इंडिया की उड़ान (AI 1741) लैंडिंग के वक्त बर्ड हिट का शिकार हो गई। 164 यात्रियों को लेकर उड़े विमान के इंजन के पास पक्षी टकराया, हालांकि पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। अब पटना से इतर देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट दिल्ली एयरपोर्ट की बात करते हैं।

टेकऑफ या लैंडिंग के दौरान उड़ान सुरक्षित रहे, इसके लिए तमाम चल रहे उपायों के बीच हाल ही में दिल्ली एयरपोर्ट का संचालन करने वाली संस्था डायल ने रनवे पर पक्षियों को डराने के लिए 'बर्ड-स्कैरर' (विशेष पटाखों) की आपूर्ति का टेंडर जारी किया था।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल पटाखों के दम पर बर्ड स्ट्राइक रोकी जा सकती है, जब एयरपोर्ट के बाहर नियमों की सरेआम अवहेलना हो रही हो।

विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत बर्ड स्ट्राइक 500 फीट से कम ऊंचाई पर टेकऑफ और लैंडिंग के समय होती हैं। ऐसे में एयरपोर्ट की चारदीवारी के बाहर की लापरवाही सीधे विमानों के रास्ते में खतरा बनती है।

विडंबना देखिए कि एप्रोच पाथ का हवाला देकर द्वारका स्थित भारत वंदना पार्क में पिलर की ऊंचाई तो कम करा दी गई, लेकिन जमीनी कचरे पर ध्यान नहीं दिया गया।

नियम कागजों पर, जमीनी हकीकत में कचरा

वायुयान अधिनियम 1937 की धारा 91 स्पष्ट निर्देश देती है कि एयरपोर्ट के आसपास खुले में कचरा फेंकना, जलभराव या मांस-मछली के अवशेष डालना सख्त प्रतिबंधित है, क्योंकि ये गतिविधियां पक्षियों (विशेषकर चील और कौवों) को आकर्षित करती हैं।

इसके बावजूद दिल्ली एयरपोर्ट के एक से दो किलोमीटर के दायरे में स्थित उपनगरी द्वारका और आसपास के इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। दिल्ली कैंट में कई जगह पशुपालन से जुड़ी गतिविधियां होती हैं।

खुले में उपले सुखाए जाते हैं। गोबर के ढेर लगे होते हैं। गोबर के ढेल में पनपने वाले कीड़ों के लिए पहले छोटे पक्षी और बाद में छोटे पक्षी को देखते हुए वहां बड़े पक्षी भी आकर्षित होते हैं। लेकिन इन बातों पर शायद ही किसी एजेंसी का ध्यान जाता हो।

द्वारका सेक्टर-8 व सेक्टर 22 में जिन स्थानों पर पहले कचरा न फेंकने के चेतावनी बोर्ड लगे थे, उन्हें या तो ढक दिया गया है या हटा दिया गया है। इतना ही नहीं, एक पुराने चेतावनी बोर्ड के ठीक पास निगम ने कूड़ा एकत्र करने और छंटाई का केंद्र बना दिया है।

मटियाला में छठ घाट के पास खुले में मछली बाजार सजता है। मटियाला, गोयला डेयरी, डाबड़ी मोड़ और द्वारका मोड़ जैसे 10 किमी के दायरे वाले इलाकों में खुले नालों, जलभराव और कचरे के ढेरों में आग लगाने जैसी लापरवाही सरेआम सामने आ रही है।

देश में सबसे ज्यादा बर्ड हिट यहीं

दिल्ली एयरपोर्ट देश के उन एयरपोर्ट में शामिल है जहां बर्ड हिट के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए जाते हैं। यहां वर्ष 2020 में जहां बर्ड हिट के 62 मामले सामने आए थे, वहीं 2021 में यह बढ़कर 94 हो गए।

इसके बाद 2022 और 2023 में स्थिति बेहद गंभीर रही, जब यह आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए क्रमशः 183 और 185 तक पहुंच गया। हालांकि वर्ष 2024 में घटनाओं में थोड़ी कमी दर्ज की गई और कुल 130 मामले आए, लेकिन 2025 में केवल जून तक ही 41 बर्ड स्ट्राइक दर्ज की जा चुकी थीं, जो लगातार बने इस बड़े खतरे की ओर इशारा करती हैं।

यानि अगर एमसीडी और स्थानीय प्रशासन ने वायुयान अधिनियम के नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया, तो रनवे पर केवल पटाखे फोड़कर आसमान के इस खतरे से निपटना नामुमकिन होगा।

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