मासिक भत्ता ढाई लाख से बढ़ाकर 2.30 करोड़ करने की मांग, पत्नी की भारी-भरकम मांग के खिलाफ साकेत कोर्ट पहुंचा पति
दिल्ली के साकेत कोर्ट में घरेलू हिंसा मामले में पत्नी द्वारा मासिक भरण-पोषण की मांग 2.5 लाख से बढ़ाकर 2.3 ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
पत्नी ने भरण-पोषण की मांग 2.5 लाख से 2.3 करोड़ की।
पति ने साकेत कोर्ट में इस मांग को चुनौती दी।
कोर्ट ने देरी माफ की, पति पर 15 हजार जुर्माना।
गौरी शर्मा, दक्षिणी दिल्ली। घरेलू हिंसा संबंधी शिकायत मामले में पत्नी की ओर से मासिक भरण-पोषण की मांग ढ़ाई लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 2 करोड़ 30 लाख रुपये कर दी गई। लगभग 100 गुना के अप्रत्याशित मांग को लेकर पति ने साकेत कोर्ट में चुनौती दी है।
कोर्ट ने पति निशांत आनंद को राहत देते हुए रिवीजन याचिका दाखिल करने में हुई 52 दिन की देरी माफ कर दिया है।हालांकि, कोर्ट ने इसके लिए पति पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लागत जमा करने के बाद ही रिवीजन याचिका को सुनवाई के लिए रिकार्ड पर लिया जाएगा।
पूर्व वकील और पत्नी पर लगाए आरोप
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी की कोर्ट में दाखिल अर्जी में पति की ओर से देरी के लिए पूर्व वकील की निष्क्रियता और पत्नी की ओर से संशोधित शिकायत की प्रति उपलब्ध नहीं कराने को जिम्मेदार बताया गया। पति के वकील ने दलील दी कि पूर्व वकील ने आदेश के बाद कानूनी उपाय के बारे में जानकारी नहीं दी।
वहीं, पत्नी की ओर से इन दलीलों का विरोध करते हुए पति पर जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया गया। इसको लेकर शनिवार को आदेश जारी करते हुए कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दाखिल मूल शिकायत में संशोधन की अनुमति मांगी थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आठ अप्रैल 2026 को इसकी अनुमति दे दी थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
संशोधन के बाद भरण-पोषण की मांग ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ 30 लाख रुपये प्रतिमाह और मुआवजे की मांग दो लाख से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई। मूल शिकायत 17 पन्नों की थी, जो संशोधन के बाद 110 से अधिक पन्नों की हो गई।
कोर्ट ने माना कि 52 दिन की देरी के पीछे दिए गए कारण पर्याप्त हैं और इसे जानबूझकर की गई देरी नहीं कहा जा सकता। साथ ही पत्नी को हुई असुविधा को देखते हुए 15 हजार रुपये की लागत निर्धारित की। इसमें 7500 रुपये पत्नी को देने का निर्देश दिया गया है। रिवीजन याचिका पर अब 18 नवंबर को सुनवाई होगी।
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