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हौजरानी अग्निकांड: 4 घंटे तक चली फोरेंसिक टीम की जांच, 'सिल्वर कैटेगरी' में पंजीकृत था होटल; हुए कई खुलासे

Published: Sat, 06 Jun 2026 05:00 AM (IST)

हौजरानी अग्निकांड के तीसरे दिन फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर चार घंटे तक जांच की, जिसमें आग के कारणों और ...और पढ़ें

मालवीय नगर के हौजरानी स्थित अवैध होटल में लगी आग के बाद जांच करती फोरेंसिक टीम। विपिन शर्मा

मालवीय नगर के हौजरानी स्थित अवैध होटल में लगी आग के बाद जांच करती फोरेंसिक टीम। विपिन शर्मा 

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जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। दिल्ली में हौजरानी अग्निकांड के तीसरे दिन फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर विस्तृत जांच शुरू कर दी।

टीम आग के शुरुआती बिंदु, शॉर्ट-सर्किट की संभावना और आग फैलने के कारणों की पड़ताल कर रही है। जले हुए तार, इलेक्ट्रानिक उपकरणों और अन्य सामग्री के नमूने एकत्र किए गए हैं।

घटनास्थल पर जांच-पड़ताल की

विशेषज्ञ यह भी जांच रहे हैं कि भवन में फायर अलार्म, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा उपकरण कार्यरत थे या नहीं। जांच में धुएं के फैलाव और फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन की भी पड़ताल की जा रही है। टीम ने लगभग चार घंटे तक घटनास्थल पर जांच-पड़ताल की।

यह अवैध होटल ‘सिल्वर कैटेगरी’

इधर, घटना की जांच के क्रम में पता चला कि यह अवैध होटल ‘सिल्वर कैटेगरी’ के तहत पंजीकृत किया गया था। दिल्ली पर्यटन विभाग के पंजीकरण प्रमाणपत्र के अनुसार, बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) श्रेणी के इस प्रतिष्ठान को दो फ्लोर पर पर काम करने की अनुमति मिली हुई थी।

2024 से 2027 तक थी वैधता 

प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि तीन कमरे पहली मंजिल और तीन कमरे दूसरी मंजिल पर संचालित किए जा सकते हैं। दस्तावेज से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रतिष्ठान को ‘सिल्वर कैटेगरी’ के तहत पंजीकृत किया गया था, जो होटल मैनेजर जय मिश्रा के नाम पर है और इसकी वैधता वर्ष 2024 से 2027 तक थी।

हादसे के बाद अब जांच एजेंसियां यह खंगाल रही हैं कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कब और कैसे हुआ और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

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दस्तावेज के अनुसार, होटल को पंजीकृत कराते समय बेसमेंट की जानकारी नहीं दी गई थी। ऐसे में होटल में मौजूद बेसमेंट और दो मंजिल से ऊपर की मंजिल अवैध थी। जबकि इन तीनों जगहों पर ही मेहमानों को ठहराये जाने के अलावा रसोई तक चलाई जा रही थी।

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