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दिल्ली में 4.88 करोड़ का बयाना लेकर टीडीआर आवेदन वापस लिया, जमीन भी तीसरे पक्ष को बेची; EOW ने दर्ज किया केस

Published: Sun, 04 Oct 2026 07:10 AM (IST)

आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गुरुग्राम के खिड़की दौला गांव में टीडीआर धोखाधड़ी मामले में रमा जिंदल और मानव केबल्स एंड वायर्स लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

आर्थिक अपराध शाखा ने रमा जिंदल और मानव केबल्स एंड वायर्स लिमिटेड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एआई इमेज

आर्थिक अपराध शाखा ने रमा जिंदल और मानव केबल्स एंड वायर्स लिमिटेड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एआई इमेज

HighLights

  1. EOW ने रमा जिंदल और मानव केबल्स पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।

  2. शिकायतकर्ता से 4.88 करोड़ रुपये बयाना राशि ली गई।

  3. टीडीआर आवेदन वापस लेकर जमीन तीसरे पक्ष को बेची।

मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। गुरुग्राम के खिड़की दौला गांव की अधिग्रहित जमीन के बदले मिलने वाले ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) को लेकर हुए विवाद में आर्थिक अपराध शाखा ने रमा जिंदल और मानव केबल्स एंड वायर्स लिमिटेड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

शिकायतकर्ता अरुण सागर भाटिया ने आरोप लगाया है कि उनसे टीडीआर बेचने के समझौते के नाम पर करीब 4.88 करोड़ रुपये बयाना राशि के तौर पर लिए गए।

बाद में आरोपितों ने टीडीआर आवेदन वापस लेने के साथ ही समझौते में शामिल जमीन का कुछ हिस्सा तीसरे पक्ष को बेच दिया। ईओडब्ल्यू ने मामले में 30 सितंबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

करीब 4.88 करोड़ रुपये का लिया बयाना

पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक, रमा जिंदल ने भाटिया से दिल्ली के ओबराय होटल में कई बार मुलाकात कर खिड़की दौला गांव की करीब ढाई एकड़ अधिग्रहित जमीन के बदले मिलने वाले टीडीआर को बेचने की इच्छा जताई थी।

दोनों पक्षों के बीच 25 अगस्त 2024 को समझौता हुआ। टीडीआर की कुल बिक्री कीमत करीब 49.33 करोड़ रुपये तय हुई थी। इसके तहत भाटिया ने करीब 4.88 करोड़ रुपये बयाना राशि के रूप में दिए।

औपचारिकताओं में समय और पैसा खर्च किया

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद उन्होंने टीडीआर हासिल करने की पूरी प्रक्रिया में दस्तावेज तैयार करने, डीटीसीपी हरियाणा के पोर्टल पर आवेदन करने, अधिकारियों से समन्वय करने और अन्य जरूरी औपचारिकताओं में समय और पैसा खर्च किया। उनकी कोशिशों के बाद 28 नवंबर 2024 को डीटीसीपी ने रमा जिंदल और कंपनी के पक्ष में टीडीआर के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किया।

टीडीआर आवेदन वापस लेने का अनुरोध

आरोप है कि एलओआई जारी होने के बाद भी आरोपितों ने आवश्यक शर्तें पूरी करने में टालमटोल की। भाटिया ने 11 फरवरी 2025 को कानूनी नोटिस भेजकर समझौते के मुताबिक लेनदेन पूरा करने को कहा। इसके बावजूद 27 फरवरी 2025 को आरोपितों ने उनकी जानकारी के बिना डीटीसीपी में टीडीआर आवेदन वापस लेने का अनुरोध कर दिया।

ईओडब्ल्यू ने मामले में केस दर्ज किया

शिकायतकर्ता ने बाद में सार्वजनिक सूचना जारी कर जमीन और टीडीआर को लेकर अपने अधिकारों की जानकारी दी। इसके बावजूद आरोप है कि इस वर्ष 27 फरवरी को रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिये समझौते में शामिल जमीन का एक हिस्सा गुरजीत कौर नारंग और जगजीत सिंह को बेच दिया गया। पीड़ित की शिकायत पर ईओडब्ल्यू ने मामले में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब पूरे मामले में रकम के लेनदेन, दस्तावेजों और जमीन की बिक्री से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

क्या होता है टीडीआर?

ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) एक ऐसा कानूनी और शहरी नियोजन का तरीका है, जिसके तहत किसी जमीन के मालिक के निर्माण अधिकार को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाता है।

जब सरकार सड़क, पार्क या मेट्रो के लिए निजी जमीन लेती है, तो नकद मुआवजे के बजाय टीडीआर सर्टिफिकेट देती है। जमीन का मालिक इस टीडीआर सर्टिफिकेट को अपने पास रख सकता है या किसी बिल्डर को बेच सकता है। बिल्डर इस टीडीआर का उपयोग करके निर्माण कार्य कर सकता है।

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