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दिल्ली के 6 बड़े अस्पतालों में अटकी निदेशक की नियुक्ति, 650 करोड़ के दवा घोटाले के बाद रुकी प्रक्रिया

Published: Sat, 03 Oct 2026 10:27 PM (IST)

दिल्ली सरकार के छह प्रमुख अस्पतालों में निदेशक और निदेशक-प्राचार्य की नियुक्ति प्रक्रिया 650 करोड़ रुपये के दवा घोटाले के ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. दिल्ली के छह बड़े अस्पतालों में नियुक्ति प्रक्रिया रुकी।

  2. 650 करोड़ रुपये के दवा घोटाले के कारण देरी।

  3. प्रशासनिक निर्णयों और खरीद पर पड़ रहा असर।

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के छह बड़े अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में निदेशक तथा निदेशक-प्राचार्य की नियुक्ति की प्रक्रिया दवा घोटाले के सामने आने के बाद अटक गई है।

सरकार ने इन पदों को भरने के लिए तीन मार्च को विज्ञापन जारी किया था और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 10 अप्रैल तय की गई थी। इसके बाद आवेदनों की जांच कर योग्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार करने और साक्षात्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी।

दवा घोटाले में फंसी स्वास्थ्य संस्थानों की भर्तियां

जिन संस्थानों में नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई थी, उनमें राजीव गांधी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल, जनकपुरी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान, दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान और मौलाना आजाद दंत चिकित्सा विज्ञान संस्थान शामिल हैं।

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योजना के अनुसार मई-जून तक साक्षात्कार पूरे कर नियुक्तियां की जानी थीं। हालांकि इसी दौरान करीब 650 करोड़ रुपये के दवा घोटाले का मामला सामने आने और कई वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। नियुक्ति में देरी का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है।

हालांकि सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने दवा घोटाले से नियुक्ति प्रक्रिया में देरी की बात से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पर काम चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ समय में प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

देश के 10 बड़े डॉक्टरों ने आवेदन किया

मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान में यह देरी खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संस्थान के वर्तमान निदेशक का कार्यकाल लगभग पूरा होने को है। इस संस्थान के लिए देश के 10 बड़े डाक्टरों ने आवेदन किया है।

नियुक्ति मेें देरी से अस्पताल के रोजमर्रा के महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में देरी हो सकती है। बजट के उपयोग, नए प्रस्तावों और जरूरी खर्चों से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं।

दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य जरूरी सामान की खरीद प्रक्रिया की निगरानी प्रभावित हो सकती है। अस्पताल में नई चिकित्सा सुविधाएं, विभाग या सेवाएं शुरू करने के प्रस्तावों पर निर्णय में देरी संभव है।

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