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कागजों पर चल रहा था अस्पताल, सरकार ने जारी कर दिए 14.62 लाख; मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कारनामा

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:53 PM (IST)

मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने गुना जिले के राजपुर में एक गैर-मौजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 14.62 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया।

मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कारनामा

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का नया और हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। राज्य स्वास्थ्य निदेशालय ने गुना जिले के राजपुर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) के रखरखाव और नए मेडिकल उपकरण खरीदने के लिए 14.62 लाख का बजट जारी कर दिया।

लेकिन जब इस आवंटन की पड़ताल हुई, तो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारी दंग रह गए, क्योंकि राजपुर में ऐसा कोई कम्युनिटी हेल्थ सेंटर असल में मौजूद ही नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों को मजबूत करने की एक योजना बनाई थी। इसकी कैटेगरी-सी के तहत जिलेवार बजट और उपकरणों की लिस्ट जारी की गई। पब्लिक हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टरेट के डिप्टी डायरेक्टर द्वारा जारी आदेश में CHC राजपुर को एक पूरी तरह चालू अस्पताल मनाते हुए 14.62 लाख की राशि और उपकरणों की सूची मंजूर कर दी गई।

जब गुना के स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह आदेश देखा, तो वे हैरान रह गए। शुरुआत में उन्हें यह प्रशासनिक भूल लगी, लेकिन बाद में अधिकारियों ने आशंका जताई कि यह किसी बड़े फर्जीवाडे़ या गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

जमीनी स्तर पर नहीं की गई जांच

जिले के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि किसी भी स्वास्थ्य केंद्र के लिए बजट मंजूर करने से पहले जमीनी स्तर पर सत्यापन किया जाता है। देखा जाता है कि अस्पताल में किन चीजों की कमी है और जिले की तरफ से कितनी मांग भेजी गई है।

लेकिन इस मामले में न तो जिले की ओर से कोई मांग भेजी गई थी और न ही किसी अधिकारी ने जमीन पर जाकर जांच की। बिना किसी सत्यापन के एक गैर-मौजूद सीएचसी को लाखों रुपये आवंटित कर दिए गए।

मामला सामने आने के बाद गुना के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर ने राज्य स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिखकर इस गलती की ओर ध्यान दिलाया। CMHO ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा कि गुना जिले में CHC राजपुर नाम का कोई केंद्र संचालित नहीं है, इसलिए जारी किए गए फंड और खरीद प्रक्रिया पर आगे क्या कार्रवाई की जाए, इस पर स्थिति साफ की जाए।

स्वास्थ्य व्यवस्था और प्लानिंग पर उठे सवाल

इस घटना के बाद राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं और बजट आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक संगठनों का कहना है कि एक तरफ जहां राज्य के ग्रामीण इलाकों में अस्पतालों, डॉक्टरों और बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत है, वहीं दूसरी तरफ जो अस्पताल सिर्फ कागजों पर हैं, उनके नाम पर लाखों रुपये का बजट बहाया जा रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि इससे पहले भी कागजी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों के तबादले और पोस्टिंग के मामले सामने आ चुके हैं।

जांच में जुटा विभाग

इस मामले का खुलासा होने और सीएमएचओ का पत्र सार्वजनिक होन के बाद मामला गरमा गया है। स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर नितिन पटेल ने कहा कि उन्हें गुना सीएमएचओ के पत्र के जरिए इस मामले की जानकारी मिली है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि बिना किसी जमीनी वजूद के अस्पताल की सूची कैसे बनी और उसके नाम पर बजट कैसे पास हो गया।