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मेडिकल टूरिज्म को मिली नई उड़ान, रोबोटिक सर्जरी का क्रेज बढ़ा; दुनिया की नजर भारत पर

Published: Sat, 03 Oct 2026 10:06 PM (IST)

भारत में रोबोटिक सर्जरी का बढ़ता उपयोग मेडिकल टूरिज्म को नई गति दे रहा है, जिससे विदेशी मरीज कम लागत में अत्याधुनिक उपचार के लिए आकर्षित हो रहे हैं।

रोबोटिक सर्जरी से मेडिकल टूरिज्म को नई रफ्तार। जागरण

रोबोटिक सर्जरी से मेडिकल टूरिज्म को नई रफ्तार। जागरण

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। भारत में रोबोटिक सर्जरी का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल अब मेडिकल टूरिज्म को नई रफ्तार दे रहा है। अमेरिका और यूरोप की तुलना में कम खर्च में अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी उपलब्ध होने से विदेशी मरीजों का रुझान भारत की ओर बढ़ रहा है।

देश में रोबोटिक सर्जरी की संख्या पिछले वर्ष करीब 30 हजार थी, जो अब बढ़कर 50 हजार से अधिक हो गई है। इसी गति से विस्तार जारी रहा तो अगले वर्ष यह संख्या करीब एक लाख तक पहुंचने की संभावना है।
रोबोटिक सर्जरी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच प्रशिक्षित सर्जनों की कमी बड़ी चुनौती है।

देश में एक लाख से अधिक सर्जन विभिन्न प्रकार की सर्जरी करते हैं, लेकिन रोबोटिक सर्जरी के लिए प्रशिक्षित सर्जनों की संख्या अभी अपेक्षाकृत कम है।

वहीं, ऐसे में अगले दो वर्षों में बड़ी संख्या में सर्जनों को रोबोटिक सर्जरी के लिए प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। सोसाइटी आफ रोबोटिक सर्जरी (एसआरएस) इंडिया समेत कई संगठन इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं।

कम लागत बनी भारत की ताकत

अमेरिका और यूरोप में रोबोटिक सर्जरी की लागत काफी अधिक है। भारत में अपेक्षाकृत कम खर्च में यह सुविधा उपलब्ध होने से विदेशी मरीजों के लिए उपचार के साथ लागत भी महत्वपूर्ण आकर्षण बन रही है। इससे देश में मेडिकल टूरिज्म के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

कई क्षेत्रों में बढ़ रहा इस्तेमाल

रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल यूरोलाजी, स्त्री रोग, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, जनरल सर्जरी और कैंसर सर्जरी समेत कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है। छोटे चीरे और अधिक सटीकता जैसी विशेषताओं के कारण अस्पतालों में इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है।

रोबोटिक सर्जरी के विस्तार के साथ प्रशिक्षित सर्जनों की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ेगी। विशेषज्ञों के अनुसार रोबोटिक सिस्टम की उपलब्धता बढ़ाने के साथ सर्जनों को पर्याप्त प्रशिक्षण देना भी जरूरी है। इससे भारतीय मरीजों को अत्याधुनिक सर्जरी की सुविधा मिलने के साथ देश के मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल सकता है।

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