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अरविंद केजरीवाल को बरी करने के फैसले के खिलाफ ED ने दिल्ली HC से की अपील, समन का पालन न करने का मामला

Published: Mon, 30 Mar 2026 08:32 PM (IST)Updated: Mon, 30 Mar 2026 08:34 PM (IST)

ईडी ने आबकारी घोटाला मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरविंद केजरीवाल को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली ...और पढ़ें

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनाैती दी है।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनाैती दी है।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आबकारी घोटाला से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में बार-बार समन जारी होने के बावजूद भी पूछताछ में शामिल नहीं होने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनाैती दी है। ईडी की अपील याचिका पर बुधवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ सुनवाई करेगी। ईडी ने इस मामले में केजरीवाल के खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे।

ट्रायल कोर्ट के 22 जनवरी को इस मामले में निर्णय सुनाया था। अपील याचिका में ईडी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल जानबूझकर समन का जवाब नहीं दे रहे थे और जांच में शामिल न होकर आदेशों का पालन नहीं किया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने समन पर दिए गए अपने जवाब में बेतुकी आपत्ति उठाई थी और जानबूझकर जांच में शामिल न होने के बहाने बनाए।

वहीं, ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बरी करते हुए कहा था कि ईडी यह साबित करने में नाकाम रही कि केजरीवाल ने जानबूझकर उन्हें जारी किए गए समन का पालन नहीं किया था। ईडी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में अन्य आरोपित केजरीवाल के संपर्क में थे और इससे उन्हें अनुचित लाभ मिला और आम आदमी पार्टी को रिश्वत मिली।

मनी लांड्रिंग मामले में केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी। शीर्ष अदालत ने मनी लांड्रिंग के मामले में गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता से जुड़े सवालों को गहन विचार-विमर्श के लिए एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। वहीं, आबकारी घोटाला से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित सभी 22 आरोपितों को बरी कर दिया था। सीबीआइ ने उक्त आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

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