Interview: 'सेफ्टी टेस्ट में फेल PG होंगे सील, कम होगी कॉलेजों की फीस', DUSU अध्यक्ष Yash Dabas का एलान
एबीवीपी ने डूसू चुनाव में एनएसयूआई को हराकर अध्यक्ष सहित तीन पदों पर जीत हासिल की। नवनिर्वाचित अध्यक्ष यश डबास ...और पढ़ें

डूसू अध्यक्ष यश डबास। फोटो: जागरण
HighLights
डूसू अध्यक्ष यश डबास ने हॉस्टल सुविधा बढ़ाने को अपनी प्राथमिकता बताया
सभी पीजी, हॉस्टल और कॉलेजों का सेफ्टी ऑडिट कराना मुख्य लक्ष्य
छात्रों के लिए प्लेसमेंट, इंटर्नशिप और महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में एबीवीपी ने एनएसयूआइ को इस बार चारों खाने चित्त कर दिया। चार में से अध्यक्ष सहित तीन पदों पर एबीवीपी ने कब्जा किया।
दो महीने पहले राजधानी में जेन-जी ने नीट पेपर लीक को सड़कों पर प्रदर्शन किया था और माना जा रहा था कि इससे एबीवीपी को इस चुनाव में नुकसान होगा। इसके साथ मतदान से चंद दिन पहले सत्य निकेतन में इमारत ढह गई, जिसमें पीजी में रहने वाले डीयू के पांच विद्यार्थियों की मौत हो गई।
इसके बाद हास्टल और पीजी चुनाव में मुद्दा बन गया। इसका भी नुकसान एबीवीपी को होता दिख रहा था। लेकिन इन शंकाओं को खारिज करते हुए एबीवीपी देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में विजेता बनकर उभरा।
एबीवीपी ने जो वादे किए, छात्रों ने उन पर यकीन किया। ऐसे में अब एबीवीपी के समक्ष चुनौतियां बड़ी होंगी। इन्हीं चुनौतियों को लेकर डूसू के नवनिर्वाचित अध्यक्ष यश डबास से दैनिक जागरण के लोकेश शर्मा ने विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश...
एबीवीपी की जीत को आप किस तरह से देख रहे हैं। डूसू अध्यक्ष के रूप में आपकी प्राथमिकता क्या रहेगी?
एबीवीपी की जीत बताती है कि छात्रों के बीच राष्ट्र प्रथम की भावना प्रबल है। इसके साथ जेन-जी का भरोसा हमारे संगठन के साथ है। डीयू में हास्टल सुविधा बढ़ाने का हमने वादा किया है और यह हमारी प्राथमिकता में रहेगा।
इसके अलावा हर पीजी, हास्टल और कालेज का सेफ्टी आडिट कराएंगे। सत्य निकेतन हादसे में हमारे साथियों की मौत हुई, कोचिंग इंस्टीट्यूट में आग लगने के कारण छात्रों को खिड़कियों से कूदना पड़ा या लाइब्रेरी में पानी भरने से छात्रों ने जान गंवाई।
हम नहीं चाहते कि भविष्य में कैंपस या आसपास ऐसी कोई दुखद दुर्घटना हो। सेफ्टी आडिट में फेल होने पर परिसर को सील करवाएंगे।
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डीयू में जमीन की भारी कमी है। हास्टल के लिए नई जमीन कहां से आएगी। इसके लिए आप लोग क्या करेंगे?
सिडनी की एक यूनिवर्सिटी में हास्टल्स की बड़ी समस्या आई थी, तो उन्होंने कम जगह में 'हाई-राइज' (बहुमंजिल) बिल्डिंग बनाई, जिससे बेड्स की क्षमता ज्यादा हो सकी।
हम वैसे ही प्लान को डीयू में कापी और लागू कर सकते हैं ताकि कम ज़मीन में भी अधिक छात्रों को हास्टल मिल सके। हम ज्यादा से ज्यादा हास्टल बनवाने की कोशिश करेंगे।
सत्य निकेतन घटना के बाद हास्टल का एंटी माहौल बना था, उस माहौल को बदलने के लिए आपने क्या किया? डीयू के अंदर लगातार हो रही फीस बढ़ोतरी और अन्य छात्र मुद्दों को लेकर आप क्या रुख अपनाएंगे?
हास्टल का माहौल हमारे लिए कभी भी नाकारात्मक नहीं था। एबीवीपी पहले दिन से ही सत्य निकेतन हादसे के दौरान जमीनी स्तर पर छात्रों की मदद करने के लिए पहुंच गई थी।
जेन-जी हमेशा से एबीवीपी के साथ है। पिछले साल भी एबीवीपी ने 16 दिन का लगातार धरना-प्रदर्शन किया था, जिसमें 3-4 दिन की भूख हड़ताल भी की गई थी।
मैं खुद भूख हड़ताल करने वाले कार्यकर्ताओं में शामिल था। जहां भी बार-बार फीस बढ़ाई जा रही है, हम वहां निरंतर धरने करते आ रहे हैं और आगे भी फीस कम करवाने का प्रयास करेंगे।
एबीवीपी प्लेसमेंट और इंटर्नशिप के लिए छात्रों के लिए क्या कदम उठा रहा है। आप अपने चुनावी घोषणा पत्र को किस तरह पूरा करेंगे?
डूसू ने ला फैकल्टी में डा. बीआर. अंबेडकर इंटर्नशिप करवाई थी, जिसमें 1450 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने भाग लिया। इसके अलावा यूजी छात्रों के लिए भी डूसू इंटर्नशिप प्रोग्राम चलाया गया, जिससे काफी संख्या में छात्रों को इंटर्नशिप मिली।
हम एबीवीपी कार्यकर्ता 'माय डीयू, माय मैनिफेस्टो' अभियान के तहत अलग-अलग कालेजों में गए और छात्रों से सीधे संवाद करके उनकी समस्याएं व सुझाव मांगे। छात्रों से मिले इनपुट्स और फार्म्स के आधार पर ही हमारा कंबाइंड मैनिफेस्टो तैयार हुआ है, जिसे हम पूरी निष्ठा से लागू करेंगे।
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कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा के लिए आपकी क्या योजना है और दिल्ली मेट्रो में रियायती दरों पर पास की मांग को लेकर आप क्या रणनीति बना रहे हैं?
महिला सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। एबीवीपी नीत डूसू ने कैंपस में 'पिंक बूथ' खुलवाया है। हम इन पिंक बूथों की संख्या को और बढ़ाएंगे। 'यू-स्पेशल' बसों की लड़ाई भी एबीवीपी ने 25 साल लड़ी है, तब जाकर बसें दोबारा शुरू हुईं।
उसी तरह मेट्रो के रियायती पास के लिए भी हमारी लड़ाई जारी है। कोलकाता और ओडिशा में छात्रों को मेट्रो पास मिलता है, उसकी स्टडी रिपोर्ट के आधार पर हम डीयू में भी मेट्रो पास लागू करवाने के लिए प्रयासरत हैं और इसके लिए कमेटी भी बन चुकी है।
डीयू में खेलों के प्रोत्साहन के लिए आपकी क्या योजना है?
मैं खुद एक इंटरनेशनल टेनिस प्लेयर रहा हूं। जैसे अन्य यूनिवर्सिटीज में स्पोर्ट्स इवेंट्स होते हैं और हमने एबीवीपी की तरफ से 'डीयू ओलिंपिक्स' कराया। इसी तरह के बड़े स्पोर्ट्स प्रोग्राम्स करवाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को स्पाॅन्सरशिप और आगे के टूर्नामेंट्स के लिए बेहतर सुविधाएं मिलें।
