क्या फेल हो गई राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज'? 11 साल बाद DUSU में NSUI का सूपड़ा साफ, चारों प्रत्याशी हारे
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में 11 साल बाद एनएसयूआई को करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसके सभी प्रत्याशी ...और पढ़ें

DUSU चुनाव में चारों खाने चित हुई एनएसयूआई। फाइल फोटो
HighLights
डीयू छात्रसंघ चुनाव में 11 साल बाद एनएसयूआई की करारी हार।
एबीवीपी ने तीन सीटें जीतीं, एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में।
राहुल गांधी के छात्र अभियान के बीच एनएसयूआई को बड़ा झटका।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी छात्रों को लुभाने देश में निकले हैं। शनिवार को भी इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम से युवाओं को साधने की कोशिश में पहुंचे थे। पर उस कार्यक्रम के आगाज के एक घंटे पहले दिल्ली से ऐसा संदेश गया जो उनको मायूसी देने वाला था।
क्योंकि, देश में छात्र सियासत के लौटे माहौल में डीयू छात्रसंघ चुनाव में 11 वर्ष बाद पहली बार पार्टी की छात्र इकाई चारों खाने चित्त थी और उसका सुपड़ा साफ था। उसके चारों प्रत्याशी ने हार दर्ज की। जिसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ निकाले जाने लगे हैं।
बदलाव की लहर धराशायी, डीयू में लहराया भगवा
डीयू में बदलाव की लहर की उम्मीद धराशाही थी तो चारों ओर भगवा का परचम था। यह 2015 के बाद पहली बार था। क्योंकि विद्यार्थी परिषद ने तीन सीटें जीती तो एक अकेली चौथी सीट निर्दलीय के खाते में गई।
मतलब, एक भी सीट एनएसयूआइ के खाते में नहीं गई। तो किसी और छात्र संगठन के झंडे जीत के नहीं थे। जबकि, चुनाव प्रचार में एनएसयूआइ के द्वारा दावा सभी सीटों पर जीत का था।
इसके पूर्व वर्ष 2014 और 2015 में डूसू चुनाव में ऐसा परिणाम तब आया था जब केंद्र में सत्ता ने करवट ली थी और छात्रों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खासा प्रभाव था। पर इस बार तो छात्रों के मिजाज बदलने का दावा हो रहा था। अकेले यह दिल्ली का संदेश नहीं है, देश के कई विवि और कालेजों में एनएसयूआइ का प्रदर्शन निराशाजनक था।
कई राज्यों में NSUI का हाल रहा बेहाल
गुजरात विश्वविद्यालय, एमएस यूनिवर्सिटी (वडोदरा), और दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय से संबद्ध दर्जनों कालेजों में एनएसयूआइ की बुरी हार हुई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और राज्य के 60 प्रतिशत से अधिक राजकीय महाविद्यालयों में विद्यार्थी परिषद ने जीत दर्ज कर एनएसयूआइ को बुरी तरह हराया।
यह क्रम, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान और उत्तराखंड में भी देखने को मिला। असम व अरुणाचल प्रदेश तक में एनएसयूआइ का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।
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