दिल्ली के 292 जलाशयों का अभी तक सीमांकन नहीं, अतिक्रमण से कई सूखे; NGT को दी चौंकाने वाली रिपोर्ट
दिल्ली आर्द्रभूमि प्राधिकरण की एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट में राष्ट्रीय राजधानी के जलाशयों की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट ...और पढ़ें

दिल्ली आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल की गई ताजा रिपोर्ट में हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है।

समय कम है?
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विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में दम तोड़ते जलाशयों पर अतिक्रमण से लेकर विभिन्न एजेंसियों की उदासीन रवैये की भेंट चढ़ रही हैं। दिल्ली के विभिन्न जलाशयों की स्थिति को लेकर दिल्ली आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल की गई ताजा रिपोर्ट में हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है।
रिपोर्ट में एक तरफ विभिन्न जलाशयों के सीमांकन से लेकन अतिक्रमण व पानी की गुणवत्ता की स्थिति के संबंध में जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार एक तरफ जहां अब भी 292 जलाशयों का सीमांकन नहीं हो पाया है। वहीं, दूसरी तरफ कई जल निकाय पर अतिक्रमण की इतनी मोटी परत चढ़ चुकी है कि उन्हें बहाल करना अब संभव नहीं है।
दो जलाशयों पर अतिक्रमण
प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अब तक 292 जलाशयों का सीमांकन नहीं हो सका है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 124 जलाशयों का सीमांकन डीडीए ने किया है।रिपोर्ट में कहा गया कि कुल 16 जलाशयों का सीमांकन करने वाले राजस्व विभाग के अनुसार तीन जलाशयों पर पूरी तरह से अतिक्रमण हो चुका है, जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अनुसार दो जलाशयों पर अतिक्रमण है और वे पूरी तरह से सूख चुकी हैं।
कई जलाशयों को दोबारा से बहाल करना संभव नहीं
जलाशयों पर हुए अतिक्रमण के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि कई जलाशय पर पूरी तरह से अतिक्रमण कर निर्माण गतिविधियां की गई है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि व्यापक स्तर पर हुए निर्माण कार्याें के कई जलाशयों को दोबारा से बहाल करना संभव नहीं है। रिपोर्ट में प्राधिकरण ने कहा कि कुछ जलाशयों को ट्रेस करना संभव नहीं है, क्योंकि उनकी जियो-काॅर्डिनेट या भौतिक फीचर की पहचान नहीं हो पा रही है।
विभाग ने किसी भी अतिक्रमण की सूचना नहीं दी
रिपोर्ट में यह भी कहा कि अतिक्रमण की स्थिति से संकेत मिलता है कि पहचान किए गए कुछ जलाशयों के हिस्सोें पर पहले से ही सार्वजनिक ढांचों, भवनों और अन्य शहरी विकास की गतिविधियों का निर्माण किया गया है। प्राधिकरण ने अपरी रिपोर्ट में कहा कि एमसीडी, दिल्ली वक्फ बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ विकास विभाग ने किसी भी अतिक्रमण की सूचना नहीं दी है।
वहीं, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तरफ से कोई भी डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी एजेंसियों को जल निकायों के संरक्षण और सुरक्षा के साथ ही अतिक्रमण हटाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
जल की गुणवत्ता का आकलन नहीं उपलबध
रिपोर्ट में कहा गया कि जलाशयों के जल की गुणवत्ता का आंकलन उपलब्ध नहीं और इसके लिए संबंधित भू स्वामी एजेंसियों द्वारा नमूनों की जांच व निगरानी की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली पुरातत्व विभाग द्वारा जल की गुणवत्ता की स्थिति नहीं पेश की गई है।
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