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दिल्ली में एक नवंबर को कांग्रेस की महारैली, क्या फिर ठप होगा बाजारों का कारोबार? व्यापारियों ने जताई चिंता

Published: Sat, 31 Oct 2026 08:59 AM (IST)

दीपावली से ठीक पहले दिल्ली के व्यापारी राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों से चिंतित हैं, खासकर 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस ...और पढ़ें

रामलीला मैदान में जमा हुआ वर्षा का पानी। एक नवंबर को इस स्थान पर कांग्रेस की रैली होनी है। हरीश कुमार

रामलीला मैदान में जमा हुआ वर्षा का पानी। एक नवंबर को इस स्थान पर कांग्रेस की रैली होनी है। हरीश कुमार

HighLights

  1. व्यापारी 1 नवंबर की कांग्रेस रैली से चिंतित हैं।

  2. दीपावली से पहले व्यापार ठप होने का अंदेशा।

  3. महासंघ ने गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।

नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। दीपावली की तैयारियों में व्यस्त राजधानी दिल्ली के व्यापारियों की सांसें एक बार फिर अटक गई हैं। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के प्रदर्शनों से हुए भारी नुकसान से उबारने की कोशिश कर रहे व्यापारिक वर्ग के सामने अब एक नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस पार्टी की रैली तथा मार्च ने नई चिंता खड़ी कर दी है।

पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की गुहार 

रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी की महारैली है। जिसके लिए कनाट प्लेस में भी राजनीतिक मार्च निकाले जाने की योजना है, जिससे दिल्ली के प्रमुख बाजारों में बड़े पैमाने पर कामकाज ठप होने का अंदेशा जताया जा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली व्यापार महासंघ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

प्रमुख व्यावसायिक केंद्र गहरे संकट में

महासंघ के अध्यक्ष देवराज बावेजा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेन्द्र कपूर की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि अक्टूबर के शुरुआती दो हफ्तों में हुए आंदोलनों और प्रदर्शनों के कारण व्यापारी पहले ही भारी आर्थिक संकट झेल चुके हैं। ऐसे में त्योहारी सीजन के ठीक बीच में होने वाले इस तरह के आयोजनों से कनाट प्लेस, शंकर मार्केट, खान मार्केट, चांदनी चौक और बंगाली मार्केट जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र गहरे संकट में आ सकते हैं।

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दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर असर

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि आयोजकों द्वारा मार्च को 'शांतिपूर्ण' बताए जाने या इसके लिए लिखित आश्वासन देने मात्र से जमीनी हकीकत नहीं बदल जाती। इस प्रकार के आयोजनों से भारी यातायात जाम, सड़क अवरोध और भीड़भाड़ की स्थिति पैदा होती है, जिससे खरीदार बाजारों का रुख करने से कतराते हैं। इसका सीधा असर दुकानदारों, कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर पड़ता है।

राष्ट्रीय राजधानी की छवि और सुरक्षा का भी है सवाल

महासंघ ने प्रशासन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया है कि देश की राजधानी में होने वाले इन आयोजनों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पैनी नजर रहती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अप्रिय या अव्यवस्था की स्थिति से देश की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

व्यापारियों ने मांग की है कि लोक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और राजधानी के आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए दीपावली के इस संवेदनशील समय में प्रमुख व्यावसायिक मार्गों पर किसी भी जुलूस या मार्च की अनुमति न दी जाए, ताकि त्योहारी उल्लास और व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।

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