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दिल्ली की हवा सुधारने के लिए प्रदूषण के स्रोतों का 24 घंटे पता लगाएगा सिस्टम, छोटी सड़कों पर चलेंगी 30 ईवी मशीनें

Published: Tue, 29 Sep 2026 10:12 PM (IST)

दिल्ली सरकार ने 'विंटर एक्शन प्लान 2026-27' के तहत प्रदूषण नियंत्रण के लिए दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें छोटी ...और पढ़ें

सड़क की धूल को पार्टिकुलेट पॉल्यूशन का प्रमुख कारण मानते हुए सरकार ने छोटी सड़कों पर भी मशीनीकृत सफाई विस्तार का फैसला किया है। प्रतीकात्मक तस्वीर

सड़क की धूल को पार्टिकुलेट पॉल्यूशन का प्रमुख कारण मानते हुए सरकार ने छोटी सड़कों पर भी मशीनीकृत सफाई विस्तार का फैसला किया है। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. छोटी सड़कों पर 30 ईवी-आधारित स्वीपिंग मशीनें होंगी तैनात।

  2. आईआईटी दिल्ली के साथ प्रदूषण स्रोतों का रियल-टाइम विश्लेषण।

  3. प्रदूषण नियंत्रण अभियान पूरे साल चरणबद्ध तरीके से चलेगा।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने ‘विंटर एक्शन प्लान 2026-27’ के तहत जनभागीदारी के साथ दो महत्वपूर्ण और प्रभावी निर्णयों पर मुहर लगाई है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने और प्रदूषण के स्रोतों की वैज्ञानिक व रियल-टाइम पहचान करने से जुड़े इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

छोटी सड़कों पर 30 ईवी-आधारित स्वीपिंग मशीनें होंगी तैनात

सड़क की धूल को पार्टिकुलेट पॉल्यूशन का प्रमुख कारण मानते हुए सरकार ने छोटी सड़कों पर भी मशीनीकृत सफाई विस्तार का फैसला किया है।

  • दायरा : 10 मीटर से कम चौड़ाई वाली लगभग 609 किलोमीटर लंबी सड़कों को इसमें शामिल किया गया है, जिसके तहत 250 वार्डों की 854 सड़कें चिन्हित की गई हैं।
  • बजट और क्रियान्वयन : दिल्ली नगर निगम को 30 इलेक्ट्रिक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने और संचालित करने के लिए अनुदान दिया जाएगा। 10 वर्षों की अवधि में इस परियोजना पर लगभग 393.73 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • पर्यावरण के अनुकूल : इलेक्ट्रिक मशीनों के उपयोग से सफाई की पूरी प्रक्रिया खुद शून्य-उत्सर्जन पर आधारित और पर्यावरण-अनुकूल रहेगी।

आईआईटी दिल्ली के साथ रियल-टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी

वैज्ञानिक रणनीति को मजबूत करते हुए कैबिनेट ने आईआईटी दिल्ली के सहयोग से पीएम 2.5 और पीएम 10 के प्रदूषण स्रोतों का 24 घंटे रियल-टाइम विश्लेषण करने की प्रणाली को मंजूरी दी है।

  • निगरानी और अध्ययन : इसके जरिए वाहनों के धुएं, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे स्रोतों का निरंतर सटीक आकलन किया जाएगा।
  • सुपर साइट और मोबाइल लैब : राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा ‘सुपर साइट’ तथा मोबाइल प्रयोगशाला को फिर से सक्रिय किया जाएगा ताकि प्रदूषण के सभी हाटस्पाट का लक्षित अध्ययन हो सके।
  • बजट और अवधि : आईआईटी दिल्ली के साथ यह साझेदारी पांच वर्षों के लिए होगी, जिस पर करीब 19.22 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसमें रियल-टाइम डैशबोर्ड, रिपोर्टिंग और डीपीसीसी अधिकारियों का क्षमता निर्माण शामिल है।

वर्षभर चलेगा अभियान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार की यह लड़ाई केवल सर्दियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों की धूल, औद्योगिक कचरा, निर्माण गतिविधियों और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे विषयों पर पूरे साल चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।

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