दिल्ली पुलिस में इकट्ठे 20 हजार कर्मियों की होगी भर्ती, तभी सुधरेंगे हालात
दिल्ली पुलिस लंबे वक्त से अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुझ रही है। साथ ही कर्मचारियों की कमी के चलते ड्यूटी का भी दवाब बढ़ता जा रहा है जिससे उन्हें छुट्टियां मिलने में भी परेशानी हो रही है।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली पुलिस वर्षों से आइपीएस व दानिप्स के अलावा कर्मियों की भारी कमी से जूझ रही है। दिल्ली पुलिस में जब इकट्ठे 20 हजार कर्मियों की होगी भर्ती, तभी कुछ हद तक हालात सुधरेंगे। टुकड़े-टुकड़े में हजार दो हजार की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने पर इससे महकमे को कोई लाभ नहीं मिल सकता है।
कई दशक पूर्व दिल्ली पुलिस में सभी रैंकों के अधिकारियों व कर्मियों के लिए जितने पद स्वीकृत थे उसके अनुरूप भी सभी रैंक के अधिकारियों व कर्मियों की भारी कमी है। दिल्ली की जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है और पुलिसकर्मियों की संख्या घटती जा रही है, जिससे दिल्ली पुलिस राजधानी के लोगों को बेहतर कानून व्यवस्था देने में विफल साबित हो रही है।
यही वजह है कि हर तरह के आपराधिक वारदातों में बढ़ोतरी हो रही है। तीन दिन पूर्व महिला सुरक्षा को लेकर उपराज्यपाल वीके सक्सेना की अध्यक्षता में हुई दिल्ली पुलिस समेत अन्य एजेंसियों की बैठक में उपराज्यपाल ने जो दिल्ली पुलिस की संख्या बढाने के लिए छह कर्मियों (सिपाहियों) की भर्ती प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया, उससे महकमे की कुछ उम्मीद जगी है।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि अगर एक साथ इतने कर्मी दिल्ली पुलिस को मिल जाएंगे तभी कुछ हद तो फायदा होगा। टुकड़े-टूकड़े में मिलने पर कोई फायदा नहीं होगा। क्योंकि भर्ती प्रक्रिया शुरू करने पर दिल्ली पुलिस में कर्मियों को आते-आते करीब दो साल का समय लग जाता है। कोरोना के कारण दो साल कोई भी भर्ती न होने से हालात और भी बिगड़ गए। करीब ढाई करोड़ से अधिक जनसंख्या वाली दिल्ली में बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग में आइपीएस, दानिप्स व पुलिसकर्मियों की संख्या जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं है। जिसका दुष्प्रभाव यह सामने आ रहा है कि साल दर साल अपराध तो बढ़ ही रहे हैं।
बढ़ रहा है ड्यूटी का दबाव
अधिकारियों व पुलिसकर्मियों पर डयूटी का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। उन्हें छुट्टियां नहीं मिल रही है जिससे उनकी जीवन शैली पर बुरा असर पड़ रहा है। आए दिन कर्मियों द्वारा सरकारी हथियारों से खुद को गोली मार आत्महत्या कर लेने की भी बात सामने आती हैं। ताजा आंकडों को देखें तो दिल्ली पुलिस में कुल 94,255 स्वीकृत पदों में वर्तमान में 80747 अधिकारियों व कर्मियों की ही तैनाती है। यानी 13,507 अधिकारियों व कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। बीते जुलाई में करीब 12 हजार पद खाली थी। इधर सात माह में करीब ढेड़ हजार पद और खाली हो गए।
मुख्यालय के अधिकारियों की मानें तो दिल्ली पुलिस में हर साल सभी रैंक के करीब दो हजार अधिकारी व पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो जाते हैं। इनकी जगह हर साल इतने आइपीएस, दानिप्स व पुलिसकर्मियों की भर्ती नहीं हो पाती है। वैकेंसी निकालने पर उसकी प्रक्रिया पूरी होने में करीब दो साल का समय लग जाता है। एक साल सलेक्शन करने है और उसके बाद एक साल ट्रेनिंग में लग जाता है।
मुख्यालय सूत्रों की मानें तो अमूमन सभी थानों व यूनिटों जैसे स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच, स्पेशल ब्रांच, विजिलेंस, ट्रैफिक, सिक्योरिटी, बटालियन, साइबर सेल आदि में कर्मचारियों की भारी कमी है। गत वर्ष सभी जिले में एक-एक साइबर सेल थाने खोल दिया गया। स्पेशल सेल, ट्रैफिक, साइबर सेल, क्राइम ब्रांच आदि यूनिटों को भी विस्तार रूप दे दिया गया जिससे थानों में तैनात पुलिसकर्मियों को वहां से हटाकर उक्त यूनिटों में भेज दिए गए। इससे थानों में पुलिसकर्मियों की संख्या और कम हो गई है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले को स्वत: संज्ञान लेकर जब पुलिस से जवाब मांगा था तब पुलिस ने कहा था कि उनके पास कर्मचारियों की कमी है। इसपर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था। दिल्ली पुलिस ने उस समय गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजकर 52 हजार अतिरिक्त बल मुहैया कराने की मांग की थी। जिसपर 2016 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लगातार तीन साल तक तीन फेस में 15-15 हजार कर्मियों की भर्ती करने का दावा किया था। पहले फेस में 15 हजार कर्मियों की भर्ती हो गई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया।
दिल्ली पुलिस में रैंक- स्वीकृत पद- वर्तमान तैनाती- खाली पड़े
- पदआयुक्त- 1 1
- शून्यविशेष आयुक्त- 18 17
- एकसंयुक्त आयुक्त- 20 19
- एकएडिशनल पुलिस कमिश्नर- 20 13
- सातडीसीपी, एडिशनल डीसीपी- 53 59
- छह अतिरिक्तदानिप्स- 54 16 38
- एसीपी- 346 222 124
- इंस्पेक्टर- 1452 1434 18
- सब इंस्पेक्टर- 8086 6273 1813
- एएसआइ- 7312 7304 8
- हवलदार- 23708 21450 2258
- सिपाही- 50890 44043 6847
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