विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आगजनी, गोलियां और घेराव: दिल्ली में जब आमने-सामने आ गए थे पुलिस और वकील, कैसे भड़का था तीस हजारी कांड?

Published: Mon, 02 Nov 2026 05:46 PM (IST)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वकीलों से विवाद के बाद पुलिसकर्मी एक बार फिर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि ऐसा ...और पढ़ें

दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच विवाद। फोटो-दैनिक जागरण

दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच विवाद। फोटो-दैनिक जागरण

HighLights

  1. दिल्ली पुलिसकर्मी वकीलों से विवाद पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

  2. सात साल पहले भी तीस हजारी विवाद पर प्रदर्शन हुआ था।

  3. 2019 में पुलिस मुख्यालय पर अभूतपूर्व घेराव किया गया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को पुलिसकर्मी प्रोटेस्ट कर रहे हैं। यह प्रोटेस्ट वकीलों के साथ हुए विवाद के बाद किया गया। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।

तीस हजारी कोर्ट परिसर में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए हिंसक टकराव के विरोध में दिल्ली पुलिस के जवानों ने ठीक सात साल पहले पांच नवंबर 2019 को पहली बार आइटीओ स्थित तत्कालीन पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंचकर अभूतपूर्व व ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था।

पहली बार पुलिस ने की थी सुरक्षा की मांग

उस प्रदर्शन ने पुलिस आयुक्त से लेकर गृह मंत्रालय की नींद उड़ाकर रख दी थी। दिल्ली पुलिस के इतिहास में वह पहला मौका था जब निचले स्तर के पुलिसकर्मियों और उनके स्वजन ने अपने अधिकारों और सुरक्षा की मांग को लेकर करीब 11 घंटे तक पुलिस मुख्यालय का घेराव कर तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की थी।

कैसे शुरू हुआ था विवाद?

उस घटना की शुरुआत दो नवंबर 2019 को तीस हजारी कोर्ट परिसर में एक पुलिसकर्मी और एक वकील के बीच जेल वैन के पास गाड़ी पार्क करने को लेकर मामूली कहासुनी से हुई थी। मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया था।

कोर्ट परिसर में खड़ी कई गाड़ियों (अधिकतर पुलिस वाहनों) में तोड़फोड़ और आग लगा दी गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने और कैदियों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस को हवा में गोलियां चलानी पड़ी थी, जिससे एक गोली एक वकील को लग जाने से विवाद और बढ़ गया था।

झड़प में पुलिस और वकील हुए थे घायल

झड़प में तत्कालीन डीसीपी माेनिका भारद्वाज, एडिशनल डीसीपी और दो एसएचओ समेत 20 से अधिक पुलिसकर्मी और वकील घायल हो गए थे।

इस घटना के बाद तीन और चार नवंबर को साकेत कोर्ट और कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर के बाहर भी वकीलों ने पुलिसकर्मियों और पीसीआर कर्मियों से मारपीट शुरू कर दी, जिसने पुलिसकर्मियों में भारी असंतोष और आक्रोश भर गया था।

उसी के बाद पुलिसकर्मियों ने अपने आला अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह करने का निर्णय किया और पांच नवंबर की सुबह से ही हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी वर्दी और सादे कपड़ों में मुख्यालय के बाहर एकत्र हो गए थे। आज पांच साल बाद एक बार फिर से वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में गैर BS-6 वाहनों के प्रवेश पर लागू रहेगा प्रतिबंध, हाई कोर्ट से निजी वाहन मालिकों को बड़ा झटका

यह भी पढ़ें- दिल्ली में अनोखा प्रोटेस्ट: खाकी को ही मांगना पड़ा इंसाफ... ACP की 3 प्रमुख मांगें

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।