दिल्ली पुलिस ने HC में कहा- लापता छात्रों की याचिका झूठी, नक्सली विचारधारा के समर्थन में की जा रही है पूछताछ
दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में बताया कि लापता छात्रों और कार्यकर्ताओं से एक महिला के गायब होने और माओवादी/नक्सली ...और पढ़ें
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दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल हलफनामा में यह भी कहा गया कि स्पेशल सेल या किसी अन्य एजेंसी के अधिकारियों द्वारा ऐसा कोई भी काम नहीं किया गया।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लापता छात्रों को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि हिरासत में लिए गए छात्रों और कार्यकर्ताओं से एक महिला के लापता होने और माओवादी/नक्सली विचारधाराओं का समर्थन करने के आरोप में पूछताछ की जा रही है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला व न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ के समक्ष पुलिस ने बताया कि इन छात्रों को 12 मार्च, 13 मार्च और 14 मार्च को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और। पुलिस ने कहा कि अपहरण, गलत तरीके से हिरासत में रखना, यातना, यौन उत्पीड़न के आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं।
पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप
दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल हलफनामा में यह भी कहा गया कि स्पेशल सेल या किसी अन्य एजेंसी के अधिकारियों द्वारा ऐसा कोई भी काम नहीं किया गया।
जांच पूरी तरह से कानून और सही प्रक्रिया के अनुसार की गई। अदालत को यह भी बताया गया कि दो जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया था, काम नहीं कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने कई लोगों के रिश्तेदारों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं के एक समूह पर यह हलफनामा दाखिल किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में रखा था और उन्हें प्रताड़ित किया था।
बेटी से नहीं हो पा रहा था पिता का संपर्क
पुलिस ने पीठ को बताया कि आठ जुलाई, 2025 एक शिकायत में शिकायतकर्ता ने अपनी बेटी के तीन जुलाई 2025 को दिल्ली के बेर सराय स्थित अपने घर से लापता होने की बात की थी। यह भी कहा कि उनकी बेटी अधिकारों को लेकर चलाए गए जा रहे अभियान में सक्रिय रूप से शामिल थी और और फोन या सोशल मीडिया के माध्यम से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था।
कुछ लोगों से पूछताछ कर छोड़ दिया
पुलिस ने बताया कि कई लोगों पर शक था जोकि भगत सिंह छात्र एकता मंच, फोरम अगेंस्ट कार्पोरेटाइजेशन एंड मिलिटराइजेशन, युवा संघर्ष मोर्चा, और नजरिया पत्रिका से जुड़े हैं। इन सभी पर देश-विरोधी और नक्सलवादी गतिविधियों को चलाने का आरोप है। इस मामले में प्राथमिकी हुई थी और प्राथमिकी होने से पहले भी कुछ लोगों से पूछताछ कर छोड़ दिया गया था।
सीसीटीवी को संरक्षित करने का निर्देश दिया
पुलिस ने बताया कि 13 मार्च 2026 को मिली सूचना के आधार पर मारिस नगर में पांच लोगों को पूछताछ के लिए लगभग स्पेशल सेल के कार्यालय लाया गया, जबकि महिलाओं को कमरे में ही निगरानी में छोड़ दिया गया। पिछली सुनवाई पर पुलिस ने अदालत को बताया था कि हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया है। वहीं, अदालत ने पुलिस को क्षेत्र में लगे सीसीटीवी को संरक्षित करने का निर्देश दिया था।
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