दो साल से ISIS-अल कायदा से जुड़ा था दिल्ली का युवक, सोशल मीडिया से बना आतंकी; लोन वुल्फ बनने की थी तैयारी
रोहिणी से आइसिस और अलकायदा से जुड़े आतंकी लकी अहमद को गिरफ्तार किया गया है। वह दो साल से इन ...और पढ़ें

इंटरनेट मीडिया के जरिये युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा अल कायदा। (AI Generated Image)

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बृहस्पतिवार को रोहिणी से गिरफ्तार किए गए आइसिस व अलकायदा इंडिया सब कान्टिनेंट के आतंकी लकी अहमद दो साल पहले यानी किशोरावस्था से ही इन संगठनों से जुड़ गया था।
इंटरनेट मीडिया पर मानिटरिंग के दौरान उन्हीं दिनों स्पेशल सेल व केंद्रीय एजेंसी को इसके गतिविधि के बारे में पता लग गया था जिसके बाद से उसपर लगातार नजर रखी जा रही थी।
देश विरोधी गतिविधि में शामिल होने के साक्ष्य मिलने पर सेल या केंद्रीय एजेंसी उसे दबोच पाती इससे पहले आंध्र प्रदेश द्वारा हाल के दिनों में अलकायदा के कई आतंकियों को गिरफ्तार करने पर उनसे पूछताछ में लकी अहमद के बारे में जानकारी मिलते पर आंध्र प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पहुंचकर उसे सेल की मदद से रोहिणी से दबोच लिया।
इंटरनेट मीडिया के जरिए ट्रैप में फंसते युवा
स्पेशल सेल अब यह पता लगा रही है कि लकी अहमद के संपर्क के कितने ऐसे युवा हैं जो अलकायदा व अन्य संगठन से जुड़ चुके हैं ताकि उन्हें भी समय रहते पकड़ लिया जाए। अलकायदा लंबे समय से इंटरनेट मीडिया के जरिये युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा है। संगठन में पारंपरिक तरीके से भर्ती करने के बजाय डिजिटल प्लेटफार्म को अपना हथियार बना लिया है।
''इंस्पायर'' जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से अलकायदा आकर्षक ग्राफिक्स और सरल भाषा में अपनी विचारधारा फैला रहा है। टेलीग्राम व सिग्नल जैसे सुरक्षित प्लेटफार्म का उपयोग युवाओं से सीधे संपर्क करने और उन्हें ट्रैक होने से बचाने के लिए किया जाता है।
लोन वुल्फ बनने के लिए कर रहे प्रेरित
सेल का कहना है कि अल-कायदा अब बड़े समूहों के बजाय युवाओं को ''लोन वुल्फ'' बनने के लिए प्रेरित करता है। वह युवाओं को विश्वास दिलाता है कि उन्हें किसी कैंप में जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे अपने ही देश में रहकर छोटे-छोटे हमलों के जरिए अपना योगदान दे सकते हैं।
इससे युवाओं को महसूस होता है कि वे किसी बड़े और शक्तिशाली मिशन का हिस्सा हैं। अलकायदा अक्सर उन युवाओं को निशाना बनाता है जो अपनी पहचान को लेकर असमंजस में होते हैं।
जो युवा सामाजिक या आर्थिक रूप से खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं, उन्हें अल-कायदा यह कहकर बरगलाता है कि पूरी दुनिया उसके खिलाफ है। युवाओं के सामने ''अन्याय'' और ''बदले'' की एक ऐसी तस्वीर पेश किया जाता है जिससे कट्टरपंथ की राह उन्हें जायज लगने लगती है। लकी अहमद भी अपने परिवार से दूर रहता था शायद इसी वजह से उसे संगठन से जो़ड़ा गया।
स्पेशल सेल लगातार कर रहा कार्रवाई
स्पेशल सेल ने हाल के वर्षों में ''अल-कायदा इन द इंडियन सब-कॉन्टिनेंट'' और उससे प्रेरित माड्यूल के खिलाफ कई बड़े आपरेशनों को अंजाम दिया है। विशेष रूप से 2024 से 2026 के बीच की गिरफ्तारियां काफी महत्वपूर्ण रही हैं।
अगस्त 2024 को सेल ने केंद्रीय एजेंसियों, झारखंड व राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर बड़े माड्यूल का पर्दाफाश कर 14 आतंकी को गिरफ्तार किया था। इसका मुख्य सरगना डाक्टर इस्तियाक अहमद रांची के एक अस्पताल में कार्यरत था और इस माड्यूल का नेतृत्व कर रहा था।
झारखंड (रांची), राजस्थान (भिवाड़ी) और उत्तर प्रदेश से इनकी गिरफ्तारी हुई थीं। ये लोग भिवाड़ी में हथियारों की ट्रेनिंग ले रहे थे और भारत में ''खिलाफत'' स्थापित करने की योजना बना रहे थे।
इसके बाद जुलाई 2025 में आनलाइन रेडिकलाइजेशन माड्यूल का भंडाफोड़ कर सेल और गुजरात एटीएस ने अलकायदा के चार आतंकी को गिरफ्तार किया था। वे लोग इंस्टाग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड एप्स के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे थे और नकली करेंसी के जरिए टेरर फंडिंग में शामिल थे।
बीते फरवरी में स्पेशल सेल ने तमिलनाडु और बंगाल से आठ आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनमें से कुछ बांग्लादेशी नागरिक थे जो पाकिस्तान स्थित हैंडलर ''शब्बीर अहमद लोन'' के निर्देश पर काम कर रहे थे।
हालांकि इनका सीधा जुड़ाव लश्कर से भी बताया गया था, लेकिन आपरेशन में अलकायदा और अन्य बांग्लादेशी आतंकी संगठनों (जैसे अंसारुल्लाह बांग्ला टीम) के साथ इनके नेटवर्क की जांच की जा रही है।
| समय | गिरफ्तार आतंकी | प्रमुख चेहरा | मुख्य स्थान |
|---|---|---|---|
| अगस्त 2024 | 14 | डॉ. इस्तियाक अहमद | झारखंड, राजस्थान, यूपी |
| जुलाई 2025 | 04 | - | दिल्ली, गुजरात, यूपी |
| फरवरी 2026 | 08 | उमर फारुख | दिल्ली, बंगाल, तमिलनाडु |
