ACP मनस्वी वशिष्ठ की तीन मांगों में उलझे अधिकारी; पुलिसकर्मियों से संवाद का पहला दौर बेनतीजा, अब दूसरे की तैयारी
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने तबादलों के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें उनकी तीन ...और पढ़ें

एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की अगुवाई में लामबंद हुए पुलिसकर्मियों की मांग को सुनकर अधिकारी भी पसोपेश में पड़ गए हैं।
HighLights
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों का मुख्यालय में प्रदर्शन।
वकीलों के खिलाफ केस रद्द न करने की प्रमुख मांग।
अधिकारियों संग बातचीत का पहला दौर रहा बेनतीजा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहली बार मुख्यालय में अधिकारियों के फैसले के खिलाफ एकजुट होकर नारेबाजी करते पुलिसकर्मियों को शांत कराने में अधिकारियों के पसीने छूट गए। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की अगुवाई में लामबंद हुए पुलिसकर्मियों की मांग को सुनकर अधिकारी भी पसोपेश में पड़ गए हैं। खासकर, वे तीन मांगें जिनपर पहली बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका। अब दूसरी बैठक की तैयारी हो रही है।
क्या हैं प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों की तीन मांगें?
पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के साथ बैठक में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कई मांग रखी, जिनमें से तीन शर्तें बेहद अहम हैं...
- पहली- वकीलों के खिलाफ दर्ज केस रद नहीं की जानी चाहिए।
- दूसरी- बार काउंसिल सदस्य का नाम केस से नहीं हटाया जाना चाहिए था।
- तीसरी- जो भी पुलिसकर्मी सोमवार के प्रदर्शन में शामिल हुए हैं, उनके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कहा, 'अगर पुलिस विभाग निलंबन से लेकर और भी कोई सख्त कार्रवाई करना है तो केवल मेरे खिलाफ की जाए।'
तबादलों के बाद गरमाया पुलिस महकमा
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में उस समय हलचल तेज हो गई जब वकीलों के दबाव में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ के तबादले के खिलाफ पुलिसकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कड़कड़डूमा कोर्ट के विवाद के बाद वकीलों के दबाव में इन अधिकारियों को निष्क्रिय यूनिटों में भेजे जाने से खाकीधारियों में भारी आक्रोश है। इस अप्रत्याशित विरोध के चलते उच्च अधिकारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
संवाद का पहला दौर रहा बेनतीजा
पुलिस मुख्यालय में उपजे इस असंतोष को शांत करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने आंदोलनरत पुलिसकर्मियों के साथ बातचीत का पहला दौर शुरू किया, जो पूरी तरह से बेनतीजा साबित हुआ। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की प्रमुख मांगों और पुलिसर्मियों के कड़े रुख के आगे अधिकारी उलझन में पड़ गए हैं। जवानों का साफ कहना है कि बाहरी दबाव के कारण महकमे के अधिकारियों का इस तरह से तबादला किया जाना उनके मनोबल को तोड़ रहा है।
दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अब पुलिस प्रशासन की ओर से संवाद के दूसरे दौर की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि किसी भी तरह प्रदर्शनकारी जवानों को समझा-बुझाकर मामले को शांत किया जाए। हालांकि, पुलिसकर्मियों की मांगों और अनुशासन के बीच संतुलन बिठाना कमिश्नर और अन्य बड़े अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
'हमारी कुल मांगे हैं, हम प्रदर्शन नहीं सभा करने आए हैं'
"हमने अपनी मांगें पुलिस कमिश्नर के सामने रखी हैं। उन्होंने हमारी इच्छानुसार बैठक का समय दिया। हालांकि, जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, बहुत कम लोगों को खुलकर बोलने का मौका मिला। फिर भी, हमने अपनी मांगें उन्हें बता दी हैं और उन पर चर्चा चल रही है। कुछ मामलों को आज ही सुलझाना होगा... हमारी कुल पांच मांगें थीं...हम यहां प्रदर्शन करने नहीं हैं। हम सभा करने आए थे। यदि फैसला आज नहीं हुआ तो हम कहीं नहीं जा रहे हैं...अधिकारी चर्चा करने के बाद हमें बताएंगे।"
-मनस्वी वशिष्ठ, एसीपी।
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