विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'विरोध का अधिकार जरूरी, पर शहर को ठप नहीं होने देंगे', CJP प्रदर्शन को लेकर सख्ती पर बोली दिल्ली पुलिस

Published: Sat, 10 Oct 2026 12:35 AM (GMT+05:30)

दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पाबंदियों का बचाव किया है। पुलिस का कहना है कि विरोध ...और पढ़ें

सीजेपी प्रदर्शन को लेकर सख्ती पर दिल्ली पुलिस ने रखी अपनी बात। फोटो: आर्काइव

सीजेपी प्रदर्शन को लेकर सख्ती पर दिल्ली पुलिस ने रखी अपनी बात। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. पुलिस ने CJP प्रदर्शन पर पाबंदियों का बचाव किया

  2. जंतर-मंतर की क्षमता केवल 1,000 लोगों की है

  3. विरोध के अधिकार संग शहर का सामान्य जीवन भी जरूरी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने पाबंदियां लगाने के फैसले का बचाव किया है।

पुलिस का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर राजधानी के सामान्य जनजीवन, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को ठप नहीं होने दिया जा सकता।

पुलिस ने पिछले प्रदर्शनों में हुई हिंसा, पुलिसकर्मियों के घायल होने और जंतर-मंतर पर भीड़ की सीमित क्षमता का हवाला देते हुए इन प्रतिबंधों को जरूरी बताया है।

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा के साथ-साथ शहर को सुरक्षित ढंग से चलाना भी जरूरी है।

पुलिस के मुताबिक, मौजूदा प्रतिबंध अस्थायी हैं और इनका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना तथा प्रदर्शनकारियों, स्थानीय निवासियों और कारोबारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

एक दिन की अनुमति, लेकिन महीने भर चला प्रदर्शन: पुलिस

दिल्ली पुलिस ने अपने पक्ष में जुलाई में हुए एक प्रदर्शन का उदाहरण दिया। पुलिस के अनुसार, उस प्रदर्शन के लिए एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह करीब एक महीने तक जारी रहा।

पुलिस का दावा है कि इस दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,000 से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसके बाद हालात हिंसक हो गए।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की।

पुलिस ने इन घटनाओं को सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह बताते हुए कहा कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है।

जंतर-मंतर पर एक समय में सिर्फ 1,000 लोगों की क्षमता

पुलिस की एक अहम दलील जंतर-मंतर की सीमित क्षमता भी है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का कहना है कि इस प्रदर्शन स्थल पर एक समय में लगभग 1,000 लोगों को ही समायोजित किया जा सकता है।

ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से भीड़ अनियंत्रित होने और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है।

पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन की पूर्व अनुमति मिलने से संभावित भीड़ का आकलन करने, यातायात में बदलाव की योजना बनाने, आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता खुला रखने और आसपास के इलाकों में लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

बिना अनुमति प्रदर्शन पर पुलिस का कानूनी तर्क

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने कहा कि आयोजक आवश्यक अनुमति के बिना आगे बढ़ रहे थे। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की कानूनी स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि बिना अनुमति आयोजित प्रदर्शन गैरकानूनी हो सकता है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस ने आयोजकों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया और कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लोगों को बुलाने वालों को उन्हें लागू कानूनी प्रावधानों की जानकारी देनी चाहिए।

विरोध का अधिकार बनाम शहर का सामान्य जनजीवन

इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की दलील यह है कि किसी भी प्रदर्शन को इस तरह संचालित किया जाना चाहिए, जिससे लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिले, लेकिन आम नागरिकों, दुकानदारों, कामकाजी लोगों और आपातकालीन सेवाओं पर अनावश्यक असर न पड़े।

पुलिस के अनुसार, प्रतिबंधों का उद्देश्य प्रदर्शन को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि लोगों की आवाजाही और भीड़ को नियंत्रित करना है। हालांकि, इस मामले में विरोध-प्रदर्शन की स्वतंत्रता और प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के बीच संतुलन का सवाल भी अहम है।

पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि विरोध-प्रदर्शन का अधिकार बना रहना चाहिए, लेकिन इसकी वजह से पूरी राजधानी की गतिविधियां बाधित नहीं होनी चाहिए।

यह भी पढ़ें- 'दिल्ली पुलिस के साथ तालमेल बिठाएं', CJP के विरोध-प्रदर्शन से पहले गृह सचिव का राज्यों और UT को निर्देश

यह भी पढ़ें- दिल्ली एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के लिए अलर्ट, CJP प्रदर्शन के चलते DIAL ने जारी की एडवाइजरी