'दिल्ली में चालान के नाम पर ठगी कर कुवैत पहुंचा रहे थे पैसे', 10 करोड़ हड़पने वाले गिरोह का भंडाफोड़; पांच गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने फर्जी चालान के नाम पर 2.21 लाख रुपये की ठगी की जांच में 10 करोड़ रुपये से ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
फर्जी चालान SMS से 10 करोड़ की साइबर ठगी।
दिल्ली पुलिस ने पांच आरोपियों को किया गिरफ्तार।
ठगी का पैसा कुवैत के बैंक खाते तक पहुंचा।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। यातायात चालान के भुगतान के नाम पर भेजे गए एक फर्जी लिंक से हुई 2.21 लाख रुपये की ठगी की जांच में दिल्ली पुलिस ने 10 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
जांच में देशभर से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 544 शिकायतें इस नेटवर्क से जुड़ी मिली हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम का वित्तीय तार कुवैत स्थित नेशनल बैंक ऑफ कुवैत के खाते तक पहुंचा है।
आरोपितों के कब्जे से 15 फोन और 52 पासबुक बरामद
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 15 मोबाइल फोन और टैबलेट, 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक और चेकबुक, 14 कंपनियों की मुहर, पांच पीओएस मशीन, आठ क्यूआर कोड स्कैनर, एक सोने की चेन और एक कार बरामद की है।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान राजस्थान के उदयपुर निवासी मोती सिंह बघेला, हरदोई निवासी हरषपाल, दिल्ली के दयालपुर निवासी विक्की, उदयपुर निवासी विशाल दास वैष्णव और पंजाब के मलेरकोटला निवासी बरजेश कुमार के रूप में हुई है।
फर्जी चालान के SMS से करता था ठगी
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, 28 नवंबर 2025 को साइबर थाने में ई-एफआइआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता को यातायात नियमों के उल्लंघन के चालान के भुगतान के नाम पर एक एसएमएस भेजा गया था।
इसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद उनके क्रेडिट कार्ड से 2.21 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी हो गई। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की तो पता चला कि इस तरह के फर्जी संदेश बड़ी संख्या में अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर भेजे जा रहे थे।
रिवार्ड प्वाइंट के लालच में फंसते रहे लोग
जांच में सामने आया कि आरोपित फर्जी चालान, डिलीवरी के पते के सत्यापन और रिवार्ड प्वाइंट के नाम पर लोगों को लिंक भेजते थे। तकनीकी जांच में करीब 3300 फिशिंग एसएमएस भेजे जाने का पता चला। पुलिस के अनुसार, इन संदेशों के जरिये लोगों को फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर उनकी बैंकिंग और कार्ड संबंधी जानकारी हासिल करने की साजिश रची जाती थी।
तीन दिन में 41 हजार से अधिक लोगों को भुगतान
पुलिस को जांच के दौरान विंगो कैश नाम के एक एप का भी पता चला। इस एप के जरिये रिवार्ड रिडीम करने वाले उपयोगकर्ताओं को एक से तीन रुपये तक दिए जाते थे। एप रिडीम करने के दौरान मोबाइल की स्क्रीन करीब 30 सेकंड तक लॉक रहती थी और इसी दौरान फोन से अपने आप नौ से 12 एसएमएस भेजे जाते थे।
पुलिस के मुताबिक, इस तरह लोगों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल फर्जी संदेश भेजने के लिए किया जा रहा था। रिवार्ड भुगतान से जुड़े खाते की जांच में तीन दिन के भीतर 41 हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं को करीब दो करोड़ रुपये वितरित किए जाने का पता चला।
कमीशन पर खुलवाते थे बैंक खाते
जांच में पता चला कि ठगी के लेनदेन और रिवार्ड भुगतान के लिए अलग-अलग कंपनियों के नाम पर चालू खाते खुलवाए गए थे। इनमें श्री बालाजी एंटरप्राइजेज और एसके स्पोर्ट्स के खाते शामिल थे।
आरोपित कमीशन लेकर कंपनियों के दस्तावेज तैयार कराने, बैंक खाते खुलवाने और उनसे जुड़े डेबिट कार्ड, चेकबुक तथा सिम कार्ड दूसरे लोगों को उपलब्ध कराने का काम करते थे।
कई राज्यों से आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब में कार्रवाई कर पांचों आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता की ठगी गई रकम का पता लगाने पर उसका तार कुवैत स्थित नेशनल बैंक ऑफ कुवैत के खाते तक पहुंचा। मामले में अन्य लोगों की भूमिका और पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच की जा रही है।
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