दिल्ली में दीवाली पर बिकेंगे पटाखे या लगेगा बैन? कारोबारियों की बढ़ी चिंता; सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
दिल्ली के पटाखा कारोबारी सर्वोच्च न्यायालय से दीवाली से पहले पटाखों की बिक्री पर स्पष्ट निर्णय का इंतजार कर रहे ...और पढ़ें

दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर फैसले का इंतजार। फोटो-दैनिक जागरण
HighLights
पटाखा कारोबारी सर्वोच्च न्यायालय से तत्काल निर्णय चाहते हैं।
पुलिस पुराने स्टॉक को जब्त कर रही, अनिश्चितता बढ़ी।
कई व्यापारियों ने पटाखों की जगह सजावटी सामान बेचना शुरू किया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया और असमंजस की स्थिति के बीच पटाखा कारोबारियों ने सर्वोच्च न्यायालय से तत्काल निर्णय लेने का आग्रह किया है। ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके, क्योंकि दीवाली आने में केवल कुछ ही दिन शेष है।
पटाखा कारोबारियों का कहना है कि अगर वह पुराने बचे हुए पटाखो का स्टॉक बेचने के लिए बाहर निकाल रहे हैं तो पुलिस उनके पटाखों को जब्त कर रही है।
दिल्ली फायर वर्क्स ट्रेडर्स एसोसिएशन की मांग
दिल्ली फायर वर्क्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव जैन का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने पटाखों की बिक्री पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन स्थिति भी स्पष्ट नहीं की है। इस कारण उनकी मुश्किलें और अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। यदि न्यायालय अनुमति दे दें वह समय से लाइसेंस लेकर पटाखों की बिक्री शुरू कर सकेंगे।
क्या पटाखों की बिक्री के समर्थन में दिल्ली सरकार?
राजीव जैन ने बताया कि सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति देने और लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार भी पटाखों की बिक्री के समर्थन में है और सरकार की ओर से प्रदूषण में पटाखों की हिस्सेदारी को लेकर जो आंकड़े दिए गए हैं, उनके मुताबिक यह काफी कम है।
पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री गोपाल राय ने भी इसके दो प्रतिशत से कम होने की बात कही थी। जबकि, राजीव जैन ने इसका आंकड़ा 0.4 प्रतिशत बताया है। हालांकि, माना जा रहा है कि अगले सप्ताह के आरंभ में न्यायालय अपना निर्णय स्पष्ट कर सकता है।
लाइसेंस कारोबारी को मिल सकती है अनुमति
राजीव जैन के अनुसार पिछले वर्षों में करीब 125 से 150 स्थायी लाइसेंस धारक पटाखों का कारोबार करते रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की ओर से अस्थायी लाइसेंस भी जारी किए जाते थे। इस बार अदालत से अनुमति मिलने पर स्थायी लाइसेंस धारक अपनी दुकानें खोल सकेंगे और दिल्ली पुलिस अस्थायी लाइसेंस भी जारी कर सकती है। अदालत जितने दिनों की अनुमति देगी, उसी अवधि तक दुकानें खुलेंगी।
पटाखों की जगह बेच रहे सजावटी सामान
पटाखों की बिक्री को लेकर पिछले कुछ वर्षों में होने वाली अनिश्चितता के कारण कई पीढ़ियों से इस व्यापार में लगे लोगों ने अपना काम बदल लिया है। सदर बाजार जैसे प्रमुख पटाखा बिक्री के बाजारों में काम करने वाले स्थायी दुकानदार या तो अब बिजली के सजावटी उपकरणों और या फिर आर्टिफिशियल फूल माला समेत अन्य वस्तुओं की बिक्री कर रहे है।
राजीव जैन के अनुसार दिल्ली में कई कारोबारी पिछले 50 से 100 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े हैं। अधिकांश कारोबारियों के पास अपनी दुकानें हैं। लेकिन, पिछले कुछ वर्षो से पटाखों की बिक्री लगातार प्रतिबंधित होने के कारण उनका कारोबार प्रभावित हुआ है तो वह जगह छोड़ने के बजाय दूसरे सामान बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
पटाखों की बिक्री बंद होने के बाद व्यापारी दीवाली पर दुकानों में सजावटी सामान, फूल-पत्तियां और त्योहारों से जुड़ी दूसरी वस्तुएं बेचने को मजबूर है।
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