हौजरानी अग्निकांड के बाद सख्त हुई दिल्ली सरकार, अवैध निर्माण रोकने में नाकाम अफसरों को होगी जेल
दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा उल्लंघन रोकने में विफल अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। लापरवाह अधिकारियों ...और पढ़ें

दिल्ली सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करती हुई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता। (सौजन्य- दिल्ली सरकार)
HighLights
अवैध निर्माण रोकने में विफल अधिकारी जाएंगे जेल।
आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत होगी कठोर कार्रवाई।
जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां बढ़ाई गईं, जवाबदेही तय।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में अवैध निर्माण और आग से सुरक्षा संबंधी नियमों के उल्लंघन से अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं जिसमें कई लोगों की जान चली जाती है। हौजरानी स्थित अवैध होटल में आग लगने से भी 21 लोगों की मृत्यु हो गई है।
इस तरह घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने तथा अनधिकृत निर्माण व अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन कर नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्णय लिया है। इसमें विफल रहने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने से लेकर संपत्ति के नुकसान का प्रविधान किया जाएगा।
सीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में इसे लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक की जानकारी देते हुए आशीष सूद ने बताया कि लापरवाह व भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की विभिन्न धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत अधिकतम दो वर्ष की कैद व जुर्माने का प्रविधान है।
आवश्यक होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रविधानों का भी उपयोग किया जाएगा। राजस्व वसूली अधिनियम-1890 के तहत सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों के वेतन, पेंशन तथा संपत्तियों से की जाएगी। साथ ही बिल्डर, भवन मालिक व कालोनाइजर के बैंक अकांउट व चल अचल संपत्ति को फ्रीज व अटैच किया जाएगा।
बैठक में अधिकारियों की जवाबदेही को और कठोर बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट में नकारात्मक टिप्पणी दर्ज की जाएगी, जिसका प्रभाव उनके भविष्य की सेवा पर पड़ेगा। केवल अधीनस्थ कर्मियों पर कार्रवाई करने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की शक्तियों में वृद्धि
विभिन्न एजेंसियों और निकायों के बीच प्रशासनिक अधिकारों के बिखराव के कारण अक्सर नियमों का कड़ाई से पालन नहीं हो पाता है। इसके समाधान के लिए सरकार ने जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों को और प्रभावी बनाने का फैसला किया है। अब संबंधित प्रशासनिक जिलों में कार्यरत किसी भी विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, उनके विरुद्ध सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने, एफआइआर दर्ज कराने, अवकाश स्वीकृत या निरस्त करने तथा अपने कर्तव्यों में विफल रहने वाले अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने की शक्ति डीएम के पास होंगी।
बैठक में दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, डीडीए उपाध्यक्ष, एमसीडी आयुक्त, एनडीएमसी के चेयरमैन, डिविजलन कमिश्नर, सभी डीएम, निगम उपायुक्त तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
- आग लगने के काल प्राप्त होने से लेकर दमकल दल के मौके पर पहुंचने तक की पूरी समयावधि का डिजिटल रिकार्ड उपलब्ध होगा।
- भवन विभागों में तैनात कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता और अन्य अधिकारी स्थानांतरण से पहले अपने कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों और जारी प्रमाणपत्रों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करना होगा।
- गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस व्यवस्था होगी।
- ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल मैपिंग का उपयोग कर हर तीन महीने में निर्माण गतिविधियों का अद्यतन रिकार्ड तैयार होगा। क्षेत्र में नए निर्माण की पहचान होने पर संबंधित अधिकारी को इसकी सूचना मिल जाएगी और उसके द्वारा की गई कार्रवाई का रिकार्ड भी सुरक्षित रहेगा।
- अनधिकृत निर्माणों की शिकायतों के लिए एक समर्पित आनलाइन पोर्टल का निर्देश, जहां पटवारी से लेकर जिला मजिस्ट्रेट और अन्य किसी भी अधिकारी के विरुद्ध शिकायत दर्ज हो सकेगी।
- मंडलायुक्त स्तर पर विशेष ड्रोन सेल गठित करने का सुझाव दिया, जो नियमित निगरानी का कार्य करेगा।
- विधि विभाग को ऐसे मामलों में अदालत में प्रभावी पैरवी के लिए मजबूत अधिवक्ता पैनल तैयार करने का निर्देश।
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