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यूपी में ग्रीन बेल्ट में सिर्फ 200 वर्गमीटर तक के निर्माण ही होंगे वैध, अवैध निर्माण पर सरकार सख्त

Published: Thu, 04 Jun 2026 12:38 PM (IST)

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने अवैध निर्माणों को नियमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें ग्रीन बेल्ट पर 200 वर्गमीटर तक के भवनों को सशर्त वैध माना जाएगा।

ग्रीन बेल्ट में सिर्फ 200 वर्गमीटर तक के निर्माण ही होंगे सशर्त वैध। (तस्वीर- फाइल)

ग्रीन बेल्ट में सिर्फ 200 वर्गमीटर तक के निर्माण ही होंगे सशर्त वैध। (तस्वीर- फाइल)

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आवास विभाग द्वारा तैयार किए गए जिस प्रस्ताव को कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दी है, उसके तहत 29 विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित विकास क्षेत्र तथा 72 विनियमित क्षेत्र आदि में 31 मार्च तक के ऐसे निर्माण जो भू-उपयोग के विपरीत बने हैं, उन्हें जिला पंचायत के पास नक्शे के आधार पर ही वैध नहीं माना जाएगा।

भू-उपयोग के विपरीत ग्रीन बेल्ट में 200 वर्गमीटर के भूखंड पर बने भवनों को ही सशर्त वैध माना जाएगा। इससे अधिक क्षेत्रफल पर बने निर्माण अवैध मानते हुए उनके खिलाफ ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जाएगी।

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग का भी दायित्व संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी वर्ष 30 जनवरी को विकास प्राधिकरण और जिला पंचायतों के बीच मानचित्र पास करने को लेकर बढ़ते विवाद को समाप्त करने के संबंध में निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए थे।

अगर कोई निर्माण तालाब, नाला, राजस्व भूमि, सड़क आदि की जमीन पर है, तो उसे अवैध मानकर ऐसा नक्शा पास करने वाले जिला पंचायत के अधिकारी-अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। ग्रीन बेल्ट के अलावा अन्य भू-उपयोग में किए गए निर्माण को वैध करने के लिए कन्वर्जन शुल्क वसूला जाएगा।

हालांकि, सरकार ने संबंधित भवन स्वामियों को राहत देने के लिए कन्वर्जन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय किया है। चूंकि 31 मार्च तक के ही निर्माण के मानचित्र वैध माने जाने हैं, इसलिए जिला पंचायतों को तक के स्वीकृत किए गए सभी मानचित्र संबंधित विकास प्राधिकरणों को 15 दिनों में सौंपना होगा।

प्राधिकरण उन्हें भवन उपविधि के मानकों के तहत जांचेगा। सही पाए जाने पर उन्हें पंजीकृत करेगा। चूंकि प्रदेश के 17 नगर निगम सहित 762 नगरीय निकाय में अभी लगभग 200 के ही मास्टर प्लान बने हैं, इसलिए कैबिनेट ने शेष क्षेत्रों के मास्टर प्लान भी छह माह में तैयार करने के लिए कहा है।

इस बीच मास्टर प्लान के दायरे से बाहर वाले क्षेत्रों के मानचित्र पास करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तय की गई है। अगर कोई निर्माण आबादी क्षेत्र में है, तो उसे वैसे ही वैध माना जाएगा।

उपविधि के तहत कृषि भूमि पर किए गए आवासीय निर्माण, लगाए गए उद्योग आदि को वैध माना जाएगा। ऐसे सभी निर्माणों को बनाए जाने वाले मास्टर प्लान में समाहित कर लिया जाएगा। कृषि भूमि के मल्टीप्लेक्स, कमर्शियल निर्माण आदि में इस्तेमाल को वैध नहीं माना जाएगा।

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