'किडनैपर' ने 40 हजार की फिरौती मांग भेजा अपना ही UPI क्यूआर कोड, 3 घंटे में दिल्ली पुलिस ने दबोचा
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 13 वर्षीय बच्चे का अपहरण कर 40 हजार की फिरौती मांगने वाले 22 वर्षीय आरोपी ने अपनी ...और पढ़ें

दिल्ली पुलिस ने महज 3 घंटे के भीतर नाबालिग को किडनैपर से सुरक्षित छुड़ाकर आरोपित को सलाखों के पीछे भेज दिया। एआई इमेज
HighLights
13 वर्षीय बच्चे का अपहरण, 40 हजार की फिरौती मांगी गई।
किडनैपर ने ऑनलाइन भुगतान के लिए अपना यूपीआई क्यूआर कोड भेजा।
दिल्ली पुलिस ने 3 घंटे में बच्चे को बचाया, आरोपी गिरफ्तार।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ज्योति नगर थाने से सामने आई अपहरण की यह वारदात किसी फिल्मी थ्रिलर स्टोरी से कमतर नहीं है, लेकिन इसमें सस्पेंस से ज्यादा 'मास्टरमाइंड किडनैपर' पर उसकी नासमझी भारी पड़ गई।
13 साल के एक मासूम का किडनैप कर 40 हजार की फिरौती मांगने वाले एक 22 साल के नौसिखिए अपराधी ने पुलिस को खुद अपना पता थमा दिया। नतीजा यह हुआ कि दिल्ली पुलिस ने महज 3 घंटे के भीतर नाबालिग को किडनैपर से सुरक्षित छुड़ाकर आरोपित को सलाखों के पीछे भेज दिया।
शाम 7:14 बजे बजी घंटी और शुरू हुआ काउंटडाउन
30 अक्टूबर दिन शुक्रवार की की शाम 7:14 बजे ज्योति नगर थाने में अचानक हड़कंप मच गया। एक मां बदहवास हालत में पहुंची और बताया कि सामान लेने निकला उसका 13 साल का बेटा लौटकर नहीं आया। कुछ ही देर में किडनैपर का फोन आया और उसने सीधे 40 हजार रुपये की फिरौती मांग ली।
फौरन एफआईआर दर्जकर तलाश शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी तनवीर अशरफ की निगरानी और थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पर्वेश कसाना के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम गठित की गई। एएसआई गजराज सिंह और हेड कॉन्स्टेबल अमित तोमर की टीम अमर कॉलोनी पहुंची और धारा 140(2) बीएनस के तहत एफआईआर दर्ज कर बच्चे की तलाश शुरू कर दी।
किडनैपर की चतुराई पड़ी भारी
शातिर बनने की कोशिश कर रहा किडनैपर तब अपनी ही बेवकूफी के जाल में फंस गया जब उसने नगदी के बजाय फिरौती की रकम ऑनलाइन मांगने की जिद की। पुलिस ने भी अपनी चाल चली और कॉल पर किडनैपर को ट्रांजेक्शन की बातों में उलझाए रखा।
रुपयों के लालच में किडनैपर ने बिना सोचे-समझे पुलिस को रुपये भेजने के लिए एक ऑनलाइन यूपीआई क्यूआर कोड भेज दिया। पुलिस अफसर ने बिना एक सेकंड गंवाए अपने खाते से पांच हजार रुपये तुरंत उस क्यूआर कोड पर ट्रांसफर कर दिए।
साइबर कैफे से कैश लेकर हुआ रवाना
इसके बाद पुलिस ने डिजिटली तकनीकी निगरानी कड़ी कर दी। पुलिस ने क्यूआर कोड की लोकेशन निकाली, जो करावल नगर के एक साइबर कैफे संचालक सुनील सैनी की निकली। पुलिस जब वहां पहुंची तो पता चला कि 22 साल का एक लड़का एक मासूम बच्चे के साथ आया था और कैफे मालिक को 50 रुपये का कमीशन देकर पांच हजार रुपये नगद ले गया था।
पुलिस ने फिर बिछाया 5 हजार रुपये का 'जाल'
दुकान के सीसीटीवी फुटेज में सब कैद हो चुका था। वीडियो देखने के बाद मां ने अपने बच्चे की पहचान कर ली। अब तक पुलिस समझ चुकी थी कि किडनैपर कितना नामसमझ और लालची है। अगली चाल चलते हुए पुलिस ने उसी क्यूआर कोड पर दोबारा पांच हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
दोबारा लालच में आया आरोपित, पुलिस ने दबोचा
जैसे ही आरोपित के मोबाइल पर दोबारा रुपये आने का नोटिफिकेशन गया, वह 50 रुपये के कमीशन के लालच में मासूम बच्चे को साथ लेकर दोबारा उसी साइबर कैफे की तरफ भागा।हालांकि, इस बार वहां रुपये देने वाला कैफे मालिक नहीं, बल्कि सादी वर्दी में तैनात दिल्ली पुलिस की टीम उसकी राह देख रही थी। आरोपित जैसे ही काउंटर पर पहुंचा, पुलिस टीम ने झपट्टा मारकर उसे दबोच लिया और बच्चे को बिना एक खरोंच आए सुरक्षित बचा लिया।
सदर बाजार का डिलीवरी बॉय निकला आरोपित
पकड़े गए आरोपित की पहचान आकाश (22 वर्ष), निवासी लोनी (यूपी) के रूप में हुई है, जो सदर बाजार में डिलीवरी हेल्पर का काम करता है। उसने बताया कि वह बच्चे को अपने चचेरे भाई के जरिए जानता था और स्कूटी पर घुमाने के बहाने फुसलाकर ले गया था। पुलिस ने आरोपित के पास से फिरौती के पांच हजार रुपये नगद, उसका मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल स्कूटी बरामद कर ली है। इस तरह महज तीन घंटे में बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया।
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