सरकारी बंगले और चार जजों से शुरू हुआ था दिल्ली हाई कोर्ट, जानें लाहौर से शेरशाह रोड तक का गौरवशाली इतिहास
दिल्ली हाई कोर्ट की स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को की गई थी। शुरुआत में चार जजों के साथ एक सरकारी ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट का इतिहास। फोटो- दिल्ली हाईकोर्ट
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट की स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को हुई।
शुरुआत में चार जजों ने सरकारी बंगले से काम किया।
पहले हिमाचल प्रदेश पर भी इसका क्षेत्राधिकार था।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट का इतिहास उसकी मौजूदा भव्य इमारत से पहले का है। इसकी औपचारिक स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को हुई, लेकिन इसकी जड़ें 1919 में लाहौर में स्थापित हाई कोर्ट से जुड़ी हैं।
आजादी से पहले दिल्ली का क्षेत्राधिकार लाहौर हाई कोर्ट की अधीन था। यह व्यवस्था 1947 तक चली। 1954 में पंजाब सरकार का सचिवालय चंडीगढ़ स्थानांतरित हुआ तो हाई कोर्ट भी वहां चला गया।
कैसे हुआ दिल्ली हाईकोर्ट का निर्माण?
पंजाब हाई कोर्ट की नाम से काम करने वाली अदालत ने 15 राजपुर रोड स्थित सर्किट पीठ की जरिए दिल्ली पर अपना क्षेत्राधिकार जारी रखा। राष्ट्रीय राजधानी की लिए अलग हाई कोर्ट बनाने की दिशा में संसद ने पांच सितंबर 1966 को दिल्ली हाई कोर्ट अधिनियम पारित किया। इसके बाद 31 अक्टूबर 1966 को दिल्ली हाई कोर्ट अस्तित्व में आया।

चार जजों से शुरू हुई कहानी
शुरुआत में अदालत की पास अपनी इमारत नहीं थी। 1966 में चार जजों ने मौलाना आजाद रोड स्थित एक सरकारी बंगले से काम शुरू किया, जहां अब विज्ञान भवन है। कुछ महीनों बाद हाई कोर्ट कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित ट्रावनकोर हाउस पहुंचा 1967 में अदालत पटियाला हाउस स्थानांतरित हुई, जहां करीब नौ साल तक कामकाज चला।
यह परिसर अब पटियाला हाउस कोर्ट काम्प्लेक्स है। शेरशाह रोड स्थित मौजूदा इमारत की आधारशिला चार नवंबर 1968 को तत्कालीन राष्ट्रपति डा. जाकिर हुसैन ने रखी। 1976 में तैयार इमारत का उद्घाटन 25 सितंबर 1976 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने किया।

मुख्य इमारत की बाहरी हिस्से पर प्रसिद्ध कलाकार सतीश गुजराल की बनाए म्यूरल लगे हैं। चार जजों से शुरू हुआ हाई कोर्ट में अब 45 स्थायी और 15 अतिरिक्त जजों समेत कुल 60 स्वीकृत पद हैं।
दिल्ली HC के पास हिमाचल प्रदेश का क्षेत्राधिकार
शुरू में दिल्ली हाई कोर्ट का क्षेत्राधिकार सिर्फ दिल्ली नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश पर भी था। शिमला की रेवेन्सवुड इमारत में इसकी पीठ बैठती थी। 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश की पूर्ण राज्य बनने की बाद ये व्यवस्था खत्म हुई।
ये थे दिल्ली हाई कोर्ट के पहले चार जज
- मुख्य न्यायाधीश केएस हेगड़े
- न्यायमूर्ति आईडी दुआ, बाद में सुप्रीम कोर्ट की जज भी बने।
- न्यायमूर्ति एचआर खन्ना
- न्यायमूर्ति एसके कपूर
यह भी पढ़ें- दिल्ली के लिए अब शेखपुरा से भी मिलेगी स्पेशल ट्रेन, नवादा के यात्रियों को गया आने की जरूरत नहीं
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।