दाह संस्कार को लेकर दिल्ली HC में एक बदलाव की मांग, क्या है 'गौकाष्ठ' जिससे बदल जाएगा शव जलाने का तरीका?
दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर श्मशान घाटों पर पारंपरिक लकड़ी की जगह गौकाष्ठ के इस्तेमाल को ...और पढ़ें

दाह संस्कार को गौकाष्ठ को लड़की की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं। फोटो: आर्काइव
HighLights
गौकाष्ठ से अंतिम संस्कार को बढ़ावा देने की जनहित याचिका
पारंपरिक लकड़ी से होने वाले प्रदूषण, वनों की कटाई पर रोक
गौशालाओं को आर्थिक मदद, बायोमास नीति बनाने की मांग
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दिल्ली के श्मशान स्थलों और घाटों में पारंपरिक लकड़ी की जगह गौकाष्ठ (गोबर से बने लकड़ी जैसे लट्ठों) के इस्तेमाल को लागू करने और बढ़ावा देने की मांग की गई है।
यह याचिका अजय कुमार गाखर ने ट्रस्टी, गौ दान फाउंडेशन के रूप में दायर की है। याचिका में कहा गया है कि पारंपरिक अंतिम संस्कार में बड़ी मात्रा में लकड़ी के इस्तेमाल से वनों की कटाई, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है, जिससे पर्यावरण प्रभावित हो रहा हैं।
उत्सर्जन में कमी आने का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की निगरानी में भोपाल में हुए वैज्ञानिक अध्ययनों और तुलनात्मक उत्सर्जन परीक्षणों में पाया गया कि गौकाष्ठ के उपयोग से हानिकारक उत्सर्जन में भारी कमी आती है।
जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और दिल्ली समेत देश के कई राज्यों और नगर निकायों में गोबर से बने लट्ठों के इस्तेमाल को लेकर प्रयोग या सिफारिशें पहले ही की जा चुकी हैं।
नीति बनाने का निर्देश देने की मांग
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि दिल्ली में बायोमास आधारित अंतिम संस्कार प्रणाली को बढ़ावा दिया जाए, इसके लिए नीति और दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं व श्मशान घाटों में लकड़ी पर निर्भरता कम की जाए।
साथ ही गोशालाओं और पशु आश्रयों को गोबर के उपयोग से आर्थिक सहयोग देने की दिशा में भी कदम उठाने की मांग की गई है।
क्या होता है गौकाष्ठ?
गौकाष्ठ गाय के गोबर और कृषि अवशेषों जैसे भूसा, सूखी घास व लकड़ी के बुरादे से तैयार की जाने वाली कृत्रिम लकड़ी होती है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से अंतिम संस्कार, हवन और ईंधन के रूप में किया जाता है।
इसे मशीनों की मदद से लकड़ी के लट्ठों जैसा आकार देकर सुखाया जाता है। सामान्य लकड़ी की तुलना में इसे पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि इससे पेड़ों की कटाई कम होती है और गोबर का उपयोग भी हो जाता है।
कई राज्यों में श्मशान घाटों पर भी गौकाष्ठ के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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