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    परिवार-आधारित चैंबर आवंटन को चुनौती: दिल्ली हाईकोर्ट ने BCI, BCD और DHCBA से मांगा जवाब

    By VINEET TRIPATHIEdited By: Neeraj Tiwari
    Updated: Wed, 03 Dec 2025 04:49 PM (IST)

    दिल्ली उच्च न्यायालय ने परिवार-आधारित चैंबर आवंटन को चुनौती देने वाली याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और दिल्ली हाईकोर्ट बार एस ...और पढ़ें

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    प्रतिकात्मक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में वकीलों के चैंबर के परिवार-आधारित अलाॅटमेंट को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई), बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी), दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) से जवाब मांगा है। फर्स्ट जेनरेशन लायर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि इस प्रविधान में भेदभाव साफ तौर पर लिखा है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन हो सकता है।

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    अदालत ने कहा कि ऐसे नियमों को कैसे सही ठहरा सकते हैं? क्या यह किसी को लाइन में आगे बढ़ने की इजाजत देने का सही आधार हो सकता है? भेदभाव साफ तौर पर लिखा है। अदालत ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 13 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी।

    एसोसिएशन ने याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट लायर्स चैंबर्स (अलाॅटमेंट एंड ऑक्यूपेंसी) नियम 1980 को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता रुद्र विक्रम ने आरोप लगाया कि इसके लागू होने से बड़े पैमाने पर असमानता आई है और कीमती सार्वजनिक स्थान का गलत इस्तेमाल हुआ है।

    यह भी कहा गया कि नियम के नियम-पांच ए के तहत मृत्यु या प्रैक्टिस न करने वाले मौजूदा आवंटी के जीवनसाथी, बेटे और बेटियों को चैंबर का स्वत: और प्रिफरेंशियल आवंटन दिया जाता है।

    याचिका में कहा गया कि यह बतौर अधिवक्ता अपना करियर शुरू करने वाले अधिवक्ताओं के साथ भेदभाव करता है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद-14 और 21 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह हजारों प्रैक्टिस करने वाले वकीलों, खासकर युवा और पहली पीढ़ी के वकीलों को जरूरी वर्कस्पेस तक पहुंच से वंचित करता है।

    याचिका में कहा गया कि कुछ आवंटी दिल्ली के बाहर रहते हैं और दिल्ली हाई कोर्ट में शायद ही कभी पेश होते हैं, फिर भी उनके चैंबर बने हुए हैं।

    कई दूसरे मामलों में चैंबर आवंटी को जिला कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में भी एक साथ कई चैंबर आवंटित किए गए हैं।

    याचिका में हाई कोर्ट से निमय-पांच ए को रद करने, सभी आवंटन की पूरी तरह से समीक्षा करने और इस्तेमाल न किए गए चैंबर कैंसिल करने की अपील की।

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