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पटाखों की Sale पर सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा खत्म, वैध दुकानदारों ने बंद की दुकानें; अवैध आधी रात तक करते रहे बिक्री

Published: Sat, 07 Nov 2026 06:42 AM (IST)Updated: Sat, 07 Nov 2026 07:29 AM (IST)

लाइसेंस धारी दुकानदारों ने तय नियमों के तहत अपनी दुकानें संचालित कीं, वहीं दूसरी ओर उन दुकानों के बाहर के ...और पढ़ें

कुछ इस तरह से जामा मस्जिद के नजदीक पाईवालान में अवैध रूप से बिना लाइसेंस के बेचे जाते पटाखे। जागरण

कुछ इस तरह से जामा मस्जिद के नजदीक पाईवालान में अवैध रूप से बिना लाइसेंस के बेचे जाते पटाखे। जागरण

HighLights

  1. शुक्रवार के साथ ही दिल्ली में पटाखे बेचने की समयसीमा खत्म

  2. सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी समयसीमा, देर रात तक हुई बिक्री

  3. वैध दुकानदारों ने किया पालन, अवैध बेचते रहे पटाखों की खेप

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की विशेष अनुमति के बाद दिल्ली में तीन दिनों तक चली पटाखों की सीमित बिक्री का दौर शुक्रवार को संपन्न हो गया। बिक्री के अंतिम दिन पटाखा दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। खासकर जामा मस्जिद के क्षेत्र पाईवालान की पटाखा दुकानों पर मध्य रात्रि तक लोगों का तांता लगा रहा। लोग अंतिम मौके पर अपनी जरूरत के पटाखे खरीदने के लिए दुकानों पर पहुंचे, जिससे जामा मस्जिद के पाईवालान समेत दिल्ली भर के अधिकृत दुकानों पर खूब चहल-पहल देखने को मिली।

अवैध बिक्री और नियमों की अनदेखी बनी बड़ी चिंता

एक तरफ जहां लाइसेंस धारी दुकानदारों ने तय नियमों के तहत अपनी दुकानें संचालित कीं, वहीं दूसरी ओर उन दुकानों के बाहर के साथ ही सदर बाजार, भागीरथ पैलेस, चांदनी चौक, करोलबाग समेत अन्य स्थानों पर अवैध रूप से पटाखों की बिक्री ने चिंता बढ़ाई है। स्थिति यह कि अकेले पाईवालान इलाके में 50 से अधिक रेहड़ी-पटरी वाले खुलेआम और बेखौफ होकर पटाखे बेचते नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि इन अवैध विक्रेताओं को रोकने या टोकने वाला कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अमला वहां मौजूद नहीं था।

ग्रीन पटाखों की आड़ में प्रतिबंधित पटाखों का खेल

चिंता कि बात यह कि इन अवैध ठिकानों पर बिक रहे सामान की कोई जांच नहीं हो रही थी। यह साफ नहीं था कि बिकने वाले पटाखे वास्तव में पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन पटाखे हैं या फिर प्रशासनिक प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले प्रतिबंधित और जहरीले पटाखे बेचे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों में पटाखा बिक्री-खरीद की तिथियों और कड़े दिशानिर्देशों का उल्लेख होने के बावजूद धरातल पर उनकी खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं।

लाइसेंसधारी दुकानदारों में निराशा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच वैध तरीके से कारोबार करने वाले दुकानदारों में भारी मायूसी और आक्रोश देखा गया। दुकानदारों का कहना था कि तय समय सीमा समाप्त होने के बाद उनके वैध प्रतिष्ठान तो बंद करवा दिए गए, लेकिन शहर के कोने-कोने में अवैध रूप से बिना लाइसेंस के खुलेआम पटाखे बिकते रहे और प्रशासनिक तंत्र खामोश बना रहा। इस दोहरे रवैये ने कानून के पालन और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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