दिल्ली में कैसे सुधरे AQI? प्रदूषण रोकने के लिए 1200 कर्मी तैनात, फिर भी सड़कों पर धूल और खुलेआम निर्माण चालू
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए 1200 से अधिक कर्मचारी तैनात होने के बावजूद जमीनी स्तर पर ...और पढ़ें

दिल्ली गेट से राजघाट की ओर जाने वाले मार्ग में पाइप लाइन डालकर बिना मरम्मत के कारण मलबे से उड़ती धूल बढ़ा रही वायु प्रदूषण। जागरण
HighLights
दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण टीमें नदारद दिख रही हैं।
धूल, मलबा और निर्माण कार्य पर प्रतिबंध बेअसर साबित हो रहे।
लाखों के चालान के बावजूद प्रदूषण फैलाने वालों पर अंकुश नहीं।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए दिल्ली सरकार से लेकर नगर निगम और अन्य एजेंसियों ने टीमें तो गठित कर दी हैं, लेकिन जमीन पर ये टीमें नदारद दिख रही हैं। यही वजह है कि वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर धूल न उड़ने देने, मलबा खुले में न डालने और निर्माण कार्य न होने देने जैसे प्रतिबंधों का जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। ऐसे में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) कैसे सुधरेगा?
लोगों के मन में नहीं किसी का 'खौफ'
कामचलाऊ या यूं कहें कि दिखावटी नियमों के पालन के लिए किसी ने हरी चादर डाल दी है तो कहीं बिना हरी चादर के ही न केवल निर्माण किया जा रहा है, बल्कि लोग पुराने मकान भी तोड़ रहे हैं। न तो दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग का और न ही एमसीडी और पुलिस का लोगों में कोई 'खौफ' है।

प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं?
एमसीडी के अनुसार, उसने 12 जोन में करीब 700 और दिल्ली सरकार की ओर से 500 कर्मचारियों की तैनाती का दावा किया गया है। इसके अलावा दिन और रात में संयुक्त प्रवर्तन टीमें भी गश्त करने की बात कही जा रही है।
इसके बावजूद राजधानी के कई इलाकों में प्रतिबंधों का उल्लंघन जारी है। निर्माण कार्य हो रहे हैं, खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है और सड़कों पर धूल उड़ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी निगरानी व्यवस्था के बावजूद प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है।

कागजों में दर्ज चालान एवं जुर्माना और टीम के सदस्य
एमसीडी की ओर से जारी दो और तीन नवंबर की संयुक्त प्रवर्तन टीमों की कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार...
| दिनांक | गश्त का समय | जोन (Zone) | चालानों की संख्या | कुल चालान (प्रतिदिन) | कुल जुर्माना (रुपये में) |
| 2 नवंबर | दिन की गश्त | सेंट्रल जोन | 173 | 914 | 6.86 लाख |
| पुरानी दिल्ली | 136 | ||||
| नॉर्थ वेस्ट | 160 | ||||
| साउथ वेस्ट | 116 | ||||
| साउथ ईस्ट | 194 | ||||
| सेंट्रल नॉर्थ ज़ोन | 17 | ||||
| रात की गश्त | सेंट्रल नॉर्थ | 92 | |||
| साउथ ईस्ट | 26 | ||||
| 3 नवंबर | दिन की गश्त | (सभी ज़ोन मिलाकर) | 791 | 817 | ₹6.12 लाख |
| रात की गश्त | साउथ ईस्ट | 26 |
टीमों और वाहनों की स्थिति
| विवरण | दिन की टीम | रात की टीम |
| गठित टीमें | 134 टीमें (12 ज़ोन में) | 164 टीमें |
| निगरानी वाहन | 116 वाहन | - |
| तैनात अधिकारी/कर्मचारी | 660 से 688 |
दूसरी ओर, बाहरी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में सड़कों पर धूल, गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर कूड़ा जलाने और निर्माण गतिविधियां जारी रहने की शिकायतें भी हैं। मुख्य सड़कों के साथ संपर्क मार्गों पर भी नियमित सफाई और पानी के छिड़काव की कमी नजर आ रही है।
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