दिल्ली की जहरीली हवा में वाहनों का बड़ा योगदान, PM2.5 का 39% और NOx का 81% उत्सर्जन
दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की गंभीर भूमिका को देखते हुए, टेरी के एक अध्ययन ने वैकल्पिक ईंधनों ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली में वाहनों से पीएम 2.5 का 39% और नॉक्स का 81% उत्सर्जन।
टेरी अध्ययन: दिल्ली में सीएनजी, ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलनात्मक स्थिति बेहतर।
प्रदूषण घटाने को ईवी संग सीएनजी, वाहन-विशिष्ट रणनीति अपनाना जरूरी।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली की जहरीली हवा में वाहनों की भूमिका कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी में परिवहन क्षेत्र से पीएम 2.5 का करीब 39 प्रतिशत, पीएम 10 का 19 प्रतिशत और नाइट्रोजन आक्साइड (नाक्स) का 81 प्रतिशत उत्सर्जन होता है। ऐसे में वाहनों के ईंधन में बदलाव दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, वाहनों के लिए केवल एक ही वैकल्पिक ईंधन को समाधान मानना उचित नहीं होगा। यह बात द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के वाहनों के ईंधन के तुलनात्मक आकलन संबंधी अध्ययन में सामने आई है।
दिल्ली में सीएनजी सबसे मजबूत, ईवी ढांचा भी बेहतर
अध्ययन ने दिल्ली को देश के उन प्रमुख शहरों में शामिल किया है, जहां अलग-अलग ईंधन और तकनीकों के लिए उपलब्ध ढांचे का तुलनात्मक आकलन किया गया। इसमें सामने आया कि सीएनजी बुनियादी ढांचे के मामले में दिल्ली सबसे मजबूत स्थिति में है। वहीं ईवी ढांचे के लिहाज से भी दिल्ली और बेंगलुरु नौ आकलन किए गए स्थानों में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं।
लेकिन रिपोर्ट का निष्कर्ष दिल्ली की ईवी नीति के लिए खासा मायने रखता है। केवल चार्जिंग केंद्रों की संख्या बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है। पेट्रोल-डीजल या सीएनजी की तुलना में ईवी को चार्ज होने में अधिक समय लगता है। इसलिए समान संख्या में चार्जिंग केंद्र होने के बावजूद उनकी वास्तविक सेवा क्षमता कम हो सकती है।
हर वाहन के लिए अलग ईंधन
अध्ययन में दोपहिया वाहनों के लिए ईवी को दीर्घकाल का सबसे मजबूत विकल्प बताया गया है। तिपहिया वाहनों में भी मौजूदा समय में सीएनजी मजबूत है, लेकिन धीरे-धीरे ईवी के आगे आने का अनुमान है।
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निजी कारों में बदलाव धीमा रहने की संभावना है और सीएनजी लंबे समय तक मजबूत पूरक विकल्प बनी रह सकती है। व्यावसायिक चार पहिया वाहनों में ईवी दीर्घकाल में पसंदीदा विकल्प बन सकता है, जबकि सीएनजी संक्रमणकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अध्ययन ने डीजल को पर्यावरणीय और आर्थिक प्रदर्शन के लिहाज से कमजोर पाया है। वहीं सीएनजी ने कई श्रेणियों में तकनीकी, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रदर्शन के बीच बेहतर संतुलन दिखाया। ईवी को स्थानीय वायु प्रदूषण घटाने में फायदा है, लेकिन मौजूदा बिजली मिश्रण, बैटरी निर्माण और कच्चे खनिजों पर निर्भरता उसके समग्र पर्यावरणीय आकलन को प्रभावित करती है।
दिल्ली के लिए संकेत
दिल्ली के लिए अध्ययन का संदेश साफ है, वाहन प्रदूषण घटाने के लिए केवल ईवी पर निर्भर रहने के बजाय वाहन के प्रकार और इस्तेमाल के हिसाब से रणनीति बनानी होगी।
शहर में पहले से मजबूत सीएनजी ढांचे का इस्तेमाल संक्रमण के दौरान किया जा सकता है, जबकि दोपहिया, तिपहिया और उपयुक्त व्यावसायिक वाहनों में ईवी को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। अध्ययन ने यात्री कारों, टैक्सियों, बसों और हल्के वाणिज्यिक वाहनों में सीएनजी/ सीबीजी तथा लंबी दूरी के माल परिवहन में एलएनजी की भूमिका भी बताई है।
