दिल्ली की हवा सुधारने का नया रोडमैप तैयार, 15% तक घटेगा AQI; PM2.5-PM10 में भी बड़ी कटौती का लक्ष्य
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसका ...और पढ़ें

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए CAQM ने तैयार किया विस्तृत स्टेट एक्शन प्लान। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने विस्तृत स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया है।
आयोग ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2026 के अंत तक दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) में पिछले पांच वर्षों के औसत की तुलना में 15 प्रतिशत का सुधार किया जाए। इसके साथ ही, पीएम 2.5 के स्तर में 15 और पीएम 10 के स्तर में 20 प्रतिशत की कटौती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
आंकड़ों में सुधार का खाका
आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का औसत एक्यूआइ 2024 में 209 और 2025 में 191 था। नए प्लान के तहत सीएक्यूएम का लक्ष्य 2026 में इसे घटाकर 177 तक लाना है।
सूक्ष्म कणों पीएम 2.5 की बात करें तो, इसका वार्षिक औसत 2024 में 110 एवं 2025 में 99 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जिसे 2026 तक 96 तक सीमित करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, पीएम 10 का स्तर 225 (2024) और 209 (2025) से घटाकर 177 तक लाने का लक्ष्य है।
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बहु-आयामी रणनीति
सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या कई स्रोतों से जुड़ी है। इसलिए इसके समाधान के लिए परिवहन, निर्माण गतिविधियों, अपशिष्ट प्रबंधन, उद्योग और सड़क की धूल पर समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
परिवहन में बदलाव : योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों की बड़े पैमाने पर शुरुआत, मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर का विस्तार, ई वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाएगा।

सीएक्यूएम ने परिवहन क्षेत्र में सीएनजी या इलेक्ट्रिक बेड़े में 5,755 बसों की कमी बताई है, जिसे पूरा करना प्राथमिकता है। इसके अलावा, मेट्रो नेटवर्क को 352 किमी से बढ़ाकर 549 किमी करने का लक्ष्य है।
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कूड़ा प्रबंधन : ओखला, भलस्वा और गाजीपुर के लैंडफिल साइटों (कूड़े के पहाड़ों) को तेजी से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोग का लक्ष्य ओखला लैंडफिल पर कूड़े का बोझ 23 लाख मीट्रिक टन से कम कर 7.2 लाख मीट्रिक टन करना है।
धूल और निर्माण : धूल नियंत्रण के लिए मैकेनिकल रोड-स्वीपिंग मशीनों का व्यापक उपयोग, सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाना और निर्माण स्थलों पर सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
निगरानी प्रणाली : शहर में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए मौजूदा 40 स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 46 की जा रही है।
बजट और औद्योगिकीकरण
रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्ययोजना के लिए निर्धारित 81.3 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट का अब तक लगभग 32 प्रतिशत हिस्सा उपयोग किया जा चुका है।
इसके अलावा, औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नियमों का पालन करने वाले अधिकृत क्षेत्रों में मौजूद 30,672 उद्योगों की जांच की जा रही है। अनधिकृत क्षेत्रों में भी इकाइयों का सर्वेक्षण जारी है।
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